
मो. इलियास/उदयपुर . गृहमंत्री के गृह जिले में पुलिस महिलाओं से जुड़े मामले में कितनी गंभीर एवं संवेदनशील है, इसका एक नमूना फलासिया थाने में बलात्कार के एक मामले में सामने आया है। ग्रामीणों ने जिन आरोपितों को पकडकऱ पुलिस को सौंपा। उनकी गिरफ्तारी की बजाय थाने में लगातार पांच दिन तक समझौते की जोड़-बाकी चली। इस बीच, आरोपित गच्चा देकर भाग गए। मामले में पुलिस ने जमकर लापरवाही बरती। एसपी तो दूर संबंधित वृत्ताधिकारी तक को सूचना नहीं दी। कार्रवाई नहीं होने पर पीडि़त पक्ष पत्रिका टीम से मिला। पत्रिका की पहल पर अब 19वें दिन पुलिस हरकत में आई और कोर्ट में पीडि़ताओं के बयान करवाए। उल्लेखनीय है कि फलासिया के संबंधित थानेदार महिपाल सिंह नाकेबंदी के दौरान नशे में पाए जाने पर फिलहाल लाइन हाजिर है।
सीओ से जांच करके पूरी रिपोर्ट तलब की है। अगर इस मामले में कोई गलती पाएगी तो उसके हिसाब से कार्रवाई करेंगे।
कुंवर राष्ट्रदीप, पुलिस अधीक्षक
7 अगस्त को फलासिया थाने की महिला कांस्टेबल पीडि़ताओं को मेडिकल के लिए उदयपुर लाई। अगले दिन मेडिकल करवाकर अकेले ही बस में बिठाकर रवाना करना चाहा।
13 अगस्त को बयानों के लिए पीडि़ताओं को थाने बुलाया गया। उस दिन उदयपुर ले जाने के बजाय समझौते के लिए दबाव डाला।
आखिर कहां से भागे
पुलिस ने चार दिन तक दोनों को अवैध रूप से हिरासत में रखा। पुलिस ने बताया कि आरोपी पानरवा चिकित्सालय ले जाते समय भाग निकले। परिजनों का आरोप है कि कांस्टेबल ने उन्हें एक टूटी खिडक़ी की फोटो दिखाते हुए बताया था कि आरोपी को पानरवा थाना शिफ्ट किया था, तब वे वहां से भाग गए।
यह था मामला
पीडि़ता ने रिपोर्ट में बताया कि गत 5 अगस्त की रात दिलीप पुत्र खन्नी उर्फ राजू दामा, राकेश पुत्र बाबूलाल दामा ने उसके व उसकी नाबालिग रिश्तेदार केसाथ बलात्कार किया। जाग होने पर बड़ी सास आ गई और उसने बाहर से दरवाजा बंद किया। आवाज लगाने से आसपास के लोग आ गए। दरवाजा खोलते ही आरोपी वहां से भागे, लोगों ने पीछा कर उन्हें पकडकऱ पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने पीडि़ताओं के बयान पर मामला दर्ज किया।
मांग रहे जवाब कई अनसुलझे सवाल
- आरोपी को चार दिन के बाद अस्पताल कैसे ले गए?
फलासिया में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है तो पानरवा स्वास्थ्य केन्द्र आरोपियों को क्यूं ले जाना पड़ा?
फलासिया झाड़ोल वृत्त में तथा पानरवा कोटड़ा वृत्त में होकर 22 किमी दूर है। फलासिया का मुख्यालय झाड़ोल लगता है।
पानरवा थाने में किसी आरोपियों को लेकर कोई नहीं आया। हमारे थाने में कोई भी खिडक़ी नहीं टूटी।
-मानसिंह चौहान, थानाधिकारी पानरवा
ग्रामीणों ने आरोपियों को पुलिस के सुपुर्द किया था। मैं स्वयं इस मामले को देख रहा हूं। इस पूरे मामले में थानाधिकारी की घोर लापरवाही सामने आई है।
ओमप्रकाश चौधरी, उपाधीक्षक झाड़ोल