
उदयपुर. मानसून आने में चंद दिन बचे हैं और आपदा की स्थिति को लेकर तैयारी है। उदयपुर सहित प्रदेश में भारी बारिश, बाढ़, आंधी, बिजली गिरने, चक्रवात और अन्य संभावित आपदाओं की पूर्व सूचना लोगों तक तेजी से पहुंचे, ऐसी व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से हाल ही जारी व्यवस्था के बाद पहला मानसून होगा, जिसमें लोगों तक रियल टाइम सूचनाएं पहुंचेंगी।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोगों तक समय पर और एक समान चेतावनी पहुंचाने के लिए अब राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) का कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल आधारित एकीकृत अलर्ट सिस्टम लागू किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश जारी करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों से नए सिस्टम का उपयोग सुनिश्चित करने को कहा है। एडीएम (प्रशासन) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रभारी अधिकारी दीपेन्द्र सिंह राठौड़ ने आदेश जारी कर राज्य आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग के निर्देशों की पालना के लिए कहा है।
यह है एकीकृत प्रणाली
एनडीएमए ने कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल आधारित एकीकृत प्रणाली शुरू की है, जो सभी अलर्ट जनरेटिंग एजेंसियों, अलर्ट अनुमोदन प्राधिकरण और अलर्ट प्रसार एजेंसियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ती है। इससे किसी भी आपदा या मौसम संबंधी चेतावनी को एक साथ विभिन्न माध्यमों से प्रसारित किया जा सकता है।
सभी अधिकारी-कार्मिक पाबंद
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह ऐप एंड्रॉयड और आइओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर निःशुल्क उपलब्ध है। जिला प्रशासन ने पुलिस, सभी उपखंड अधिकारियों, तहसीलदारों और जिलास्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से इस सिस्टम और ऐप का उपयोग सुनिश्चित कराएं।
इस तरह से मिलेंगे अलर्ट
- नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नागरिकों को क्षेत्र विशेष और स्थानीय भाषा में रियल टाइम पर चेतावनी मिलेगी। अलर्ट मोबाइल ऐप'सचेत' और वेब पोर्टल से उपलब्ध रहेंगे।
- भारी बारिश, बाढ़, आंधी, बिजली गिरने, चक्रवात और अन्य संभावित आपदाओं की पूर्व सूचना लोगों तक तेजी से पहुंच सकेगी, जिससे जनहानि व नुकसान से बचने में मदद मिलेगी।
मानसून
मानसून भारत की जलवायु का सबसे महत्वपूर्ण मौसम माना जाता है। यह सामान्यतः जून से सितंबर तक रहता है और देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा लेकर आता है। मानसून से किसानों को सबसे अधिक लाभ होता है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई और अच्छी पैदावार वर्षा पर निर्भर करती है। पर्याप्त बारिश से जलाशय, नदियां और भूजल स्तर भी भर जाते हैं, जिससे पेयजल और सिंचाई की आवश्यकता पूरी होती है। हालांकि, अत्यधिक वर्षा से बाढ़, भूस्खलन, जलभराव और बिजली गिरने जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं। इसलिए इस मौसम में सतर्क रहना आवश्यक है। मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना, अनावश्यक यात्रा से बचना और सुरक्षित स्थानों पर रहना चाहिए। सरकार और प्रशासन भी राहत एवं बचाव की तैयारियां पहले से करते हैं। संतुलित और समय पर होने वाला मानसून देश की अर्थव्यवस्था, कृषि और पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।