
उदयपुर. ऑफिस का काम खत्म हो चुका है, लेकिन दिमाग में अब भी अधूरे टास्क, अगले दिन की मीटिंग और काम का दबाव घूम रहा है। घर पहुंचने के बाद भी काम से दूरी नहीं बन पाना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन और हर समय थकान महसूस करना मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते दबाव के संकेत हो सकते हैं। लगातार काम के तनाव और उससे जुड़ी भावनात्मक थकान की स्थिति को बर्नआउट कहा जाता है। एमबी अस्पताल के मनोरोग विभाग में हर सप्ताह इससे जुड़े 50 मरीज आ रहे हैं।
काम के घंटों के बाद भी तनाव बरकरार
एमबी अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सुरेश गोचर का कहना है आज की कार्यशैली में कई लोगों के लिए ऑफिस और निजी जीवन के बीच अंतर बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है। मोबाइल पर लगातार आने वाले संदेश, काम से जुड़े फोन और समयसीमा पूरी करने का दबाव व्यक्ति को छुट्टी के दिन भी काम के बारे में सोचने पर मजबूर कर सकते हैं। धीरे-धीरे आराम का समय भी तनाव में गुजरने लगता है। पर्याप्त आराम के बावजूद थकान महसूस होना, काम में रुचि कम होना और सहकर्मियों या परिवार के सदस्यों के प्रति चिड़चिड़ापन बढ़ना ऐसी स्थिति के संकेत हो सकते हैं।
भावनात्मक थकान से कार्यक्षमता प्रभावित
डॉ गोचर ने बताया बर्नआउट केवल शारीरिक थकान तक सीमित नहीं है। इसमें व्यक्ति मानसिक रूप से खालीपन महसूस कर सकता है, अपने काम से दूरी बनाने लगता है और अपनी कार्यक्षमता को लेकर नकारात्मक सोच विकसित हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)बर्नआउट को ऐसी व्यावसायिक स्थिति के रूप में परिभाषित करता है, जो लंबे समय तक प्रबंधित नहीं किए गए कार्यस्थल के तनाव से उत्पन्न होती है। इसके तीन प्रमुख आयाम हैं—ऊर्जा की कमी या थकावट, काम से मानसिक दूरी अथवा नकारात्मकता और प्रोफेशनल प्रभावशीलता में कमी।
काम और निजी जीवन के बीच संतुलन जरूरी
लगातार तनाव की स्थिति में काम के घंटे तय करना, नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना और छुट्टी के दौरान काम से जुड़ी गतिविधियों को सीमित करना मददगार हो सकता है। पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि और परिवार या मित्रों के साथ समय बिताना भी जरूरी है। यदि थकान, उदासी, चिड़चिड़ापन या काम में रुचि की कमी लंबे समय तक बनी रहे और दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
बर्नआउट के प्रमुख संकेत
पहलू प्रमुख जानकारी
मुख्य कारण लगातार काम का दबाव और लंबे समय तक तनाव
भावनात्मक संकेत मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन और काम से दूरी
कार्यस्थल पर असर एकाग्रता और कार्यक्षमता में कमी
बचाव नियमित ब्रेक, पर्याप्त नींद और काम-निजी जीवन में संतुलन
कब लें सलाह जब लक्षण लगातार बने रहें और रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो