उदयपुर

नवीं कक्षा में फेल होने से बढ़ रहा ड्रॉप आउट, प्रदेश में करीब 40 हजार बच्चों ने छोड़ा स्कूल

आठवीं तक फेल नहीं करने की शिक्षा नीति का परिणामआदिवासी परिवारों का मजदूरी के लिए पलायन भी बड़ा कारणप्रदेश में करीब 40 हजार ड्रॉप आउट
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Jun 10, 2019
education
Closure of govt schools may increase drop out

उदयपुर . आरटीई के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक किसी भी छात्र को फेल नहीं करने की शिक्षा नीति का एक बड़ा दुष्परिणाम सामने आ रहा है। 9वीं कक्षा में पहली बार असल परीक्षा देते हुए कई छात्र फेल हो जाते हैं और वे स्कूल जाना ही छोड़ देते है। इसमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है। प्रदेश में ड्रॉप आउट बच्चों का आंकड़ा 50 हजार के करीब था जिसमें से मई में चले प्रवेशोत्सव के तहत स्कूल प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और उड़ान प्रोजेक्ट की मदद से करीब 8 हजार बच्चों को स्कूल से जोड़ा गया।

अब भी 42 हजार बच्चे ऐसे हैं जिन्हें स्कूल से जोडऩा बाकी है। उदयपुर में सत्र 2017-18 के ड्रॉप आउट आंकड़ों को देखें तो यह 2500 के करीब है जिसमें आधे से ज्यादा बालिकाएं हैं। आठवीं कक्षा तक फेल नहीं करने की शिक्षा नीति के कारण बच्चों पर ज्यादा दबाव नहीं रहता है। जैसे ही वे नवीं कक्षा में आते हैं, उन पर दबाव बढ़ जाता है। शिक्षकों का भी कमजोर बच्चों पर पूरा फोकस नहीं रह पाता। होशियार बच्चे तो पास हो जाते हैं लेकिन सामान्य एवं कमजोर शैक्षिक स्तर वाले बच्चे 9वीं कक्षा की परीक्षा के झंझावात से निकल नहीं पाते हैं।

यह वजह आई सामने
ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल में पुन: दाखिला दिलाने को लेकर जब उनके घर वालों से सम्पर्क किया जा रहा है तो ग्रामीण क्षेत्रों में दो बड़े कारण सामने आते हैं। अव्वल तो 9वीं कक्षा में फेल होना है। छात्राओं के फेल होने पर अभिभावक उसे स्कूल नहीं भेजते है और घरेलू कार्य में दक्ष करने के साथ उसकी शादी की तैयारी शुरू कर देते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर लडक़ा फेल हो जाता है तो अभिभावक उसे अपने साथ छोटा-मोटा काम पर करवाने या घर की जिम्मेदारियां निभाने में जुटा देते हैं। कुछ का पढ़ाई में मन नहीं लगना जो कुछ मानते हैं कि पढक़र भी नौकरी तो नहीं लगेगी। जिले में उड़ान प्रोजेक्ट के सर्वे में फेल होने पर स्कूल छोड़ चुकी 750 बालिकाओं में से 225 से सम्पर्क किया गया है ताकि वे पुन: स्कूल से जुड़ सकें।


हमने करीब ढाई हजार ड्रॉप आउट बच्चों की पहचान की है। आदिवासी क्षेत्र में अभिभावक बच्चियों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। कुछ परिवार मजदूरी के लिए बच्चों को लेकर बाहर चले गए हैं।
रिद्धिमा शर्मा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण

दो साल के हमारे सर्वे में सामने आया कि विद्यार्थी ड्रॉप आउट इसलिए हो रहा है कि वे नवीं कक्षा में फेल हो गए। अब घर वाले उन्हें स्कूल नहीं भेज रहे या वे खुद शर्म महसूस करते हुए जाना नहीं चाहते हैं। यह कोशिश है कि इनको पुन: स्कूल से जोड़ दिया जाएगा। इसमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है।
नवीन मिश्रा, जिला प्रबंधक, उड़ान प्रोजेक्ट

नामांकन बढ़ाने के दूसरी चरण में ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल को जोड़ा जाए, इस दिशा में काम होगा। अभिभावकों से की काउंसलिंग करेंगे ताकि वे बच्चों को स्कूल नहीं छुड़वाएं।
शिवजी गौड़, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी

Published on:
10 Jun 2019 05:59 pm