उदयपुर

उदयपुर : शोध में खुलासा : चूहों-छछूंदरों पर पल रहा जानलेवा माइट, हर बुखार डेंगू नहीं, हो सकता है स्क्रब टाइफस

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के शोध में उदयपुर जिले में स्क्रब टाइफस फैलाने वाले चिगर माइट के प्रमुख वाहक की पहचान हुई है। जून 2024 से मई 2026 तक आठ तहसीलों में 512 चूहों और छछूंदरों पर अध्ययन किया गया, जिनसे 9,854 माइट मिले। इनमें 1,904 बीमारी फैलाने वाली प्रजाति के थे। घरेलू छछूंदर इसका सबसे बड़ा प्राकृतिक ठिकाना साबित हुई। शोध के अनुसार मानसून और पोस्ट-मानसून में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक रहता है।
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Updated: 31 Oct 2026, 6:04 PM IST
chigar mite
चिगर माइट

उदयपुर. बारिश के बाद अस्पतालों में बुखार के मरीजों की कतारें लंबी हो जाती हैं, लेकिन हर मरीज डेंगू या मलेरिया का ही शिकार हो, ऐसा नहीं है। इनमें से कई को स्क्रबटाइफस का संक्रमण होता है। इसकी पहचान अक्सर देरी से होती है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग की लेबोरेटरी ऑफ पब्लिक हेल्थ एंटोमोलॉजी में इस बीमारी को फैलाने वाले जीवाणु की पहचान कर ली गई है।

512 जीवों पर शोध, 9854 चिगरमाइट बरामद

शोधार्थी प्रज्ञा शर्मा ने बताया कि जून 2024 से मई 2026 के बीच उदयपुर जिले की आठ तहसीलों गिर्वा, मावली, गोगुंदा, झाड़ोल, खेरवाड़ा, कोटड़ा, ऋषभदेव और भींडर में 1,440 शर्मन ट्रैप लगाकर चूहों और छछूंदरों पर फील्ड सर्वे किया। कुल 1,440 ट्रैप में से 512 में जीव पकड़े गए, इससे कुल ट्रैप पॉजिटिविटी रेट 35.56% दर्ज हुई। गोगुंदा में सबसे अधिक 45.56%, मावली में 42.78%, कोटड़ा में 41.11% और गिर्वा में 40.56% पॉजिटिविटी मिली। 512 में से 149 जीव चिगरमाइट से संक्रमित पाए गए। इन जीवों के शरीर से कुल 9,854 चिगरमाइट एकत्रित किए गए। ट्रोम्बिकुलिनी, शोएनगास्टिनी और गाहर्लिपाइनी समूहों की कुल 8 प्रजातियों की पहचान की गई। स्क्रबटाइफस फैलाने वाला मुख्य वाहक लेप्टोट्रॉम्बिडियमडेलिएन्स सबसे अधिक संख्या 1,904 माइट यानी 19.32% में मिला, जो 6 अलग-अलग होस्ट प्रजातियों पर सक्रिय पाया गया।

घरेलू छछूंदर सबसे बड़ाठिकाना:46%माइट इसी पर

बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया के प्राकृतिक प्रसार चक्र में घरेलू छछूंदर सबसे मुख्य रिजर्वॉयर साबित हुई है।

जांच के दौरान 137 छछूंदरों में से 58 चिगरमाइट से ग्रसित पाई गईं। पूरे सर्वे में मिले कुल माइट्स में से 4565 चिगरमाइट अकेले छछूंदर पर पाए गए, जिनका प्रति जीव औसत भार 78.70 रहा। चूहों में रैटस दूसरे स्थान पर रहा, इसमें 27.92% संक्रमण दर के साथ 2,251 माइट मिले। बैंडिकोटा इंडिका से 1,079 माइट और बैंडिकोटाबेंगालेंसिस से 942 माइट मिले। वहीं छोटी घरेलू चुहिया पर एक भी चिगरमाइट नहीं पाया गया।

मानसून और पोस्ट-मानसून में सबसे अधिक खतरा

सहायक आचार्य डॉ. देवेन्द्र कुमार गोयल के अनुसार मौसम में बदलाव के साथ चिगरमाइट की आबादी और संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ता है। मानसून और उसके बाद के महीनों में नमी, वनस्पति और खेतों में बुवाई, निराई व कटाई की गतिविधियां चरम पर होती हैं। इसी समय चिगर लार्वा खेतों, घास और झाड़ियों में सक्रिय होकर भोजन की तलाश में इंसानों और जानवरों को निशाना बनाते हैं।

मौसम - जांचे गए जीव संक्रमित जीव (%) - कुल माइट्स की संख्या - सक्रिय प्रजातियां ....

प्री-मानसून (मार्च–जून) - 115 - 20.00% - 984 (9.98%) - केवल 1 (L.deliense)

मानसून (जुलाई–अक्टूबर) - 193 - 28.50% - 3,884 (39.41%) - 6 प्रजातियां

पोस्ट-मानसून (नवंबर–फरवरी) - 204 - 34.80% - 4,986 (50.59%) - सभी 8 प्रजातियां

कैसे फैलता है संक्रमण और क्यों है खतरनाक?

डॉ. देवेंद्र कुमार गोयल के अनुसार, यह बीमारी ओरिएंशियासुतसुगामुशी नाम के जीवाणु से होती है। यह जीवाणु चिगरमाइट के लार्वा के भीतर पलता है। यह आकार में बेहद सूक्ष्म होता है, जिसे आंखों से नहीं देखा जा सकता। जब संक्रमित चिगर घास या झाड़ियों से चिपककर इंसान को काटता है, तो यह बैक्टीरिया रक्त में पहुंच जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में वर्ष 2023 में स्क्रबटाइफस के 2,733 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 3,461 हो गए। उदयपुर जिले में भी वर्ष 2019 में 776, 2023 में 543, 2024 में 611 और 2025 में 231 मामले सामने आ चुके हैं।

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31 Oct 2026, 6:04 PM IST
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