
Maharana Pratap Tourist: उदयपुर। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप और मेवाड़ उनके शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान को नमन कर रहा है, वहीं प्रताप के इतिहास को सहेजने और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली एक बड़ी योजना को गुरुवार को होने वाली अहम बैठक में मूर्त रूप का इंतजार है। महाराणा प्रताप के ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने के लिए घोषित महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट फाइलों में दौड़ रहा है। महत्त्वाकांक्षी योजना के दो साल बाद अब इसके धरातल पर उतरने के पूरे आसार हैं। राजस्थान धरोहर संरक्षण प्राधिकरण के माध्यम से प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है।
प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने बताया कि 100 करोड़ से भी अधिक की इस परियोजना का अनुमोदन भी हो चुका है, वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी है। दो साल में दिवेर, चावंड और हल्दीघाटी में जमीन आवंटन का कार्य हुआ है। गुरुवार को होनी वाली बैठक में इस योजना को मूर्त रूप मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने विधानसभा में कहा था कि इस योजना के लिए हजार करोड़ भी खर्च करने पड़ें तो वह भी करेंगे।
मेवाड़ क्षेत्र में शौर्य, संस्कृति और इतिहास को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया जा रहा एक महत्वाकांक्षी पर्यटन प्रोजेक्ट है। इसके तहत 200 करोड़ रुपए की कुल लागत से 'महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट' विकसित किए जाने हैं। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य महाराणा प्रताप के जीवन और मेवाड़ के आदिवासी इतिहास व गौरव को आधुनिक तकनीकों के जरिए दुनिया के सामने लाना है।
इस सर्किट के तहत महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े 7 ऐतिहासिक स्थलों का कायाकल्प किया जाएगा, जहां लाइट एंड साउंड शो, उडी होलोग्राफिक वॉर म्यूजियम, आर्ट गैलरी और वॉटर प्रोजेक्शन मैपिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।
1. कुंभलगढ़ (प्रताप की जन्मस्थली): दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार (36 किमी) वाले इस अजेय दुर्ग पर लाइट-साउंड शो और प्रोजेक्शन मैपिंग होगी। इसके अलावा पैनोरमा, जंगल ट्रेल, टॉय ट्रेन और हेलिकॉप्टर राइड जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
2. गोगुंदा ( राजतिलक स्थली) : यहां 'राज्याभिषेक पथ स्टैच्यू वॉकवे' बनाया जाएगा। महादेव बावड़ी का जीर्णोद्धार होगा और स्थानीय भील ग्राम में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
3. दिवेर, राजसमंद (मेवाड़ का मैराथन): 1582 में मुगलों पर विजय की इस स्थली पर भव्य विजय मेमोरियल और अत्याधुनिक बैटल म्यूजियम बनाया जाएगा।
4. हल्दीघाटी, राजसमंद (युद्ध स्थली): यहां अत्याधुनिक होलोग्राफिक शो के जरिए हल्दीघाटी युद्ध के दर्शन कराए जाएंगे अमेरिका के माउंट रशमोर की तर्ज पन पहाड़ों पर 'वीर शिरोमणि शिला' तराशने का प्रस्ताव है। चेतक स्थली पर सौर ऊर्जा से चलने वाली 'चेतक ज्योति' हमेशा अखंड प्रज्वलित रहेगी।
5. चित्तौड़गढ़ (त्याग और पूर्वजों की भूमि): एक विशाल वीर गाथा दीवार बनाई जाएगी, जो लाइट एंड साउंड शो के जरिए इतिहास दर्शाएगी। साथ ही सिसोदिया राजवंश की वंशावली को मूर्तियों के रूप में सजाया जाएगा
6. चावंड, सलूंबर (निर्वाण स्थली व अंतिम राजधानी): यहां चावंड मेमोरियल, चामुंडा माता मंदिर और प्राचीन महल के अवशेषों को संवारा जाएगा। प्रताप की विशाल प्रतिमा लगेगी।
7. उदयपुर (मेवाड़ की राजधानी): यहां विशेष रूप से राजपूतों का बाल संग्रहालय और पानी पर प्रोजेक्शन मैपिंग शो का प्रस्ताव है।
घोषणा: 8 जून 2024 को महाराणा प्रताप जयंती पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट की घोषणा की, तब बजट 100 करोड़ प्रारंभिक बजट माना गया।
डीपीआर तैयारः धरोहर संरक्षण प्राधिकरण के ने प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की, वित्त विभाग से योजना की मंजूरी।
मंजूरी की उम्मीदः प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार को इस टेंडर प्रक्रिया के लिए सेंट्रल की कंपनियों और सरकार की बैठक होगी, जिसमें आगे के कार्यों का निर्णय होगा।
प्रोजेक्ट की कमानः प्रोजेक्ट की सीधी मॉनिटरिंग खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी कर रहे हैं।