उदयपुर

नानी बाई का मायरा में संगीतमय कथा सुन भावुक हुए श्रोता

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संगीतमय कथा सुन भावुक हुए श्रोता

उदयपुर. करणी माता पार्क हिरणमगरी सेक्टर 14 में चल रही नानी बाई का मायरा कथा के तीसरे दिन पुष्करदास महाराज ने संगीतमय कथा गान कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। उन्होंने सास-बहू के संबंधों के आधार पर ही पारिवारिक जुड़ाव स्थायी रहने की रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि सास उसकी बहू को बेटी और हर बहू अपनी सांस को मां समझे तो स्वर्ग कहीं ओर ढूंढने की जरूरत नहीं है। हर घर ही स्वर्ग के समान हो जाएगा। पुष्कर दास महाराज ने नरसी की कथा सुनाते हुए कहा कि नरसी को मायरी की पत्रिका व मांग की चि‍ट्ठी समधी की ओर से भेजकर नीचा दिखाने के प्रयास किए। नरसी ने सांवलिया की शरणागति के आत्मवत से सारी तैयारी की और नगर अंजार चले गए। मार्ग में अनेक समस्याएं आई, लेकिन भक्त की रक्षा भगवान ने हमेशा की तरह की। बतौर अतिथि कार्यक्रम में चंद्रसिंह कोठारी, रजनी डांगी, मोहन गुर्जर, वैभव भंडारी, चंद्रकला बोल्या, सीमा पालीवाल एवं अन्य कथा में उपस्थित हुए।

भजनों पर थिरके श्रद्धालु
नाकोड़ा नगर स्थित मीराश्रम में शरद पूर्णिमा की रात को धर्मप्रेमियों ने साध्वी अखिलेश्वरी के सान्निध्य में उत्साह के साथ धार्मिक आयोजनों में हिस्सेदारी निभाई। साध्वी ने धर्मप्रेमियों को संत मीरा, ऋषि वाल्मीकि, देवी लक्ष्मी की जयंती की शुभकामनाएं दते हुए श्रीकृष्ण रास की महिमा का सार बताया। इस मौके पर समाज को संस्कारों के प्रति आकर्षित करने की भी पहल की गई। धवल चांदनी की रोशनी में पथमेड़ा गाय के दूध से निर्मित खीर को भगवान कृष्ण के भोग लगाकर प्रसादी के तौर पर वितरित किया गया।

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Published on:
26 Oct 2018 01:21 pm
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