
जोधपुर/उदयपुर . राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आने पर युवती को उदयपुर स्थित नारी निकेतन भेजने के आदेश दिए हैं। कोर्ट में एक व्यक्ति ने युवती को अपनी कथित पत्नी बताते हुए उसे परिजनों के बंधन से मुक्त करवाने की गुहार लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने दिन में दो बार सुनवाई के बाद मामले को अत्यंत संवेदनशील प्रकृति का मानते हुए युवती को नारी निकेतन भेज दिया। निकेतन की अधीक्षक तथा विधिक सेवा प्राधिकरण, उदयपुर के पूर्ण कालिक सचिव को आगामी सुनवाई 25 मार्च तक युवती को उचित परामर्श देने के निर्देश भी दिए हैं। उदयपुर जिले के मोईनुद्दीन अब्बासी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करते हुए बताया था कि उसने 23 जुलाई, 2018 को एक युवती से शादी की थी जिसे विवाह पंजीयन अधिकारी के यहां पंजीकृत भी करवाया। उसका आरोप था कि पत्नी के परिजनों ने उसे जबरन बंधक बना रखा है। इस पर कोर्ट ने युवती को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। सुनवाई के दौरान मंगलवार को जब युवती को कोर्ट में पेश किया गया तो कई नए तथ्य सामने आते गए।
युवती ने कहा, मुझे एक वर्ग ने प्रताडि़त किया
कोर्ट चैम्बर में सुनवाई के दौरान युवती ने बताया कि उसे समाज के एक वर्ग ने न केवल प्रताडि़त किया बल्कि उसकी लज्जा भंग भी की। युवती ने न्यायाधीश संदीप मेहता तथा न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ को बताया कि उसने स्वेच्छा से शादी की थी और वह अपने पति के साथ जाना चाहती है। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को फौरन युवती के सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली को निर्देश दिए कि युवती को तत्काल पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाई जाए, क्योंकि उसने एक वर्ग से खुद को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका प्रकट की है।