
जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. जमाना बदल गया। महंगाई कहां से कहां पहुंच गई। सरकार ने सातवां वेतन आयोग भी दे दिया, लेकिन अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में भत्तों के नाम पर 'रीति-रिवाजÓ आज भी मानों बिजली के तारों पर झूलते नजर आ रहे हैं। सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ नौकरी की शेखी बघारने वाले निगम के अभियंताओं को एवीवीएनएल प्रशासन आज भी 12 रुपए में प्रतिदिन नौकर रखने और दो रुपए की साबुन बट्टी गुजारा करने की सहूलियत दे रहा है। निगम में चतुर्थश्रेणी कार्मिकों से लेकर राजपत्रित अधिकारियों तक को ऐसे-ऐसे भत्ते दिए जा रहे हैं, जिन्हें देखकर महंगाई खुद भी शर्मा जाए। निगम पहले जब राजस्थान राज्य विद्युत मण्डल हुआ करता था, तब इस तरह के भत्ते देना तय हुआ था। आज भी ये भत्ते आगे नहीं बढ़ सके हैं। 30 साल से ये भत्ते न तो बंद किए जा रहे हैं, न ही इन्हें बढ़ाने या रिवाइज्ड करने पर किसी ने सोचा। गाहे-ब-गाहे बिजली कर्मचारी यूनियन के सदस्य जरूर मांग उठाते हैं, लेकिन अधिकारी मौन हैं।
किसको, किसका कितना मिलता है?
सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंताओं को प्रतिमाह नौकर रखने के लिए 350 रुपए दिए जा रहे हैं। अधीक्षण अभियंताओं और मुख्य अभियंता को 500 रुपए हर माह मिलते हैं। इस हिसाब से उन्हें प्रतिदिन 12 रुपए में नौकर रखना पड़ता है, जो इस जमाने में महंगाई के हिसाब से हास्यास्पद लगता है।
हर माह 150 रुपए की बिजली
निगम के चतुर्थश्रेणी व मंत्रालयिक कर्मचारियों को हर महीने 150 रुपए का भत्ता बिजली उपभोग के पेटे दिया जाता है। औसतन प्रत्येक कर्मचारी के घर का बिजली बिल एक हजार रुपए तक आता ही है।
वर्दी के लिए 1650 मासिक
निगम में वाहनचालकों व तकनीकी स्टॉफ में पुरुषों को 1650 रुपए और महिलाओं को 1950 रुपए वर्दी के लिए वार्षिक भत्ता दिया जाता है। इसके अलावा भारी वाहनों के चालकों को दो सौ रुपए प्रतिवर्ष साबुन की बट्टी, डस्टर व वर्दी धुलाई के नाम पर मिलता है। इस हिसाब से प्रतिमाह 24 रुपए साबुन पर खर्च करने के मिलते हैं।
अधिकार से परे
भत्ते काफी पुराने हैं। इन्हें बंद करने या बढ़ाने का अधिकार बोर्ड को है। पांचों निगमों की बैठक में ही कोई निर्णय हो तो कुछ हो सकता है।
एनएल, सालवी, मुख्य अभियंता, उदयपुर सम्भाग