
मो.इलियास/उदयपुर.स्मार्ट शहर की सफाई व्यवस्था माकूल होनी चाहिए...कचरा नजर नहीं आए इसके लिए घर-घर से कचरा एकत्रित करने की व्यवस्था तक है, लेकिन उदयपुर शहर में यह सफाई व्यवस्था ही संदेह के घेरे में है। सफाई नहीं करनी पड़ी या फिर कोई दूसरा व्यक्ति सफाई कर चला जाए, इसके लिए बकायदा यहां कमीशन का खेल चल रहा है। पिछले दिनों एक जमादार रिश्वत लेते पकड़ा गया। अब नगर निगम ने स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी है लेकिन उनके कार्य के दायरे को लेकर असमंजस बरकरार है। निगम ने कागजों में 650 से 700 मीटर का क्षेत्र प्रति कर्मचारी में बांटा है। अगर वास्तव में इतना क्षेत्र है तो उदयपुर की गलियों में कचरा दिखना ही नहीं चाहिए। अफसोस कि जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आ जाते हैं।
अब यह व्यवस्था
निगम ने 855 पुराने सफाईकर्मियों के अलावा 1005 नए कर्मचारियों की भर्ती की। नए कर्मचारियों के आते ही निगम ने ठेका प्रणाली खत्म कर 21 वार्डो में इन कर्मचारियों की नियुक्तियां कर दी। सभी वार्डो में करीब 10 से ज्यादा कर्मचारियों को नियुक्त किया गया। निगम ने प्रति कर्मचारी का काम रिकॉर्ड में 700 मीटर दर्शाया है जबकि पूर्व कर्मचारियों का काम करीब 300 मीटर क्षेत्र है। नए मापदंड के हिसाब से कुल 7 लाख मीटर यानी 700 किलोमीटर तक का क्षेत्र होता है जो समझ से परे है।
कार्डों की होगी जांच
निगम ने समस्त कर्मचारियों के लिए 9 सितम्बर 2015 से बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू की। इसमें अंगूठा या अंगुली के निशान लगाकर ड्यूटी पर आना तय किया था, लेकिन 95 ऐसे कर्मचारी हैं जिनके बायोमेट्रिक मशीन में निशान नहीं आने पर कार्ड का विकल्प दिया हुआ है। इनमें से 35 सफाई कर्मचारी है, ये ऐसे कर्मचारी हैं जिनकी आयु 30 से 55 वर्ष के बीच है। कार्ड पंच होने पर इनकी हाजिरी मान ली जाती है। ऐसे कर्मचारियों में से कार्ड जमादारों की ओर से पंच कर मंथली बंधी उठाने के खुलासे के बाद निगम अधिकारियों ने समस्त कार्ड अपने पास रखे हैं। अब इनके कार्डों की जांचहोगी।
लगा है रिश्वत का दाग
गौरतलब है कि एसीबी टीम ने गत दिनों नगर निगम की स्थायी सफाईकर्मी सिटी स्टेशन रोड निवासी शबनम पत्नी उस्मान से रिश्वत लेते हुए जमादार इन्द्रानगर बीड़ा निवासी मकबूल पुत्र कमाल हुसैन व दलाल मल्लातलाई निवासी मुश्ताक पुत्र मोहम्मद शरीफ को गिरफ्तार किया था। दोनों अभी न्यायिक अभिरक्षा में है। इनसे पूछताछ में सफाई व्यवस्था की पोल के कई राज खुले थे।