सूर्य सप्तमी आज, उदयपुर में भी हैं सूर्य मंदिर की धरोहर, जगदीश मंदिर के अलावा इसवाल, नागदा, नांदेश्मा आदि कई जगहों पर हैं सूर्य मंदिर और मंदिरों में सूर्य देव की प्रतिमाएं
माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी सूर्य सप्तमी के रूप में मनाई जाती है। यह दिन सूर्याेपासना को समर्पित होता है। देश में सूर्य मंदिरों की बात करें तो कोणार्क के मशहूर सूर्य मंदिर के बारे में तो सभी जानते हैं कि यह वास्तुकला के हिसाब से अद्भुत सूर्य मंदिर है और यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उदयपुर या मेवाड़ में भी कई सूर्य मंदिर हैं। ये सभी एक तरह से धरोहर ही हैं, जिनसे ज्यादातर लोग अनजान हैं।
जगदीश मंदिर से लेकर रणकपुर, चित्तौड़ तक में हैं सूर्य मंदिर
उदयपुर के जगदीश मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर जब आप मंदिर की परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं तो सबसे पहला मंदिर सूर्य देव का मंदिर ही आता है। बहुत कम लोग इस पर गौर करते हैं। इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगून के अनुसार जितने सूर्य मंदिर उदयपुर व मेवाड़ में हैं उतने शायद ही कहीं होंगे। जगदीश मंदिर में सूर्य मंदिर सहित ईसवाल, नांदेश्मा, मंदेसर, गंगरार, खोर, पलाश्मा, रणकपुर, बढ़वान, मजावद, चित्तौड़ आदि में सूर्य मंदिर हैं। वहीं, वल्लभनगर, रामथली, उदयसागर, जावर आदि के मंदिर ध्वस्त हो चुके हैं, लेकिन सूर्य भगवान की प्रतिमाएं हैं तो कई के प्रमाण मौजूद हैं। इधर, आयड़ में भी लक्ष्मीनारायण मंदिर की जगह सूर्य मंदिर था।
सूर्य सप्तमी और सूर्य नमस्कार चर्चा का विषय
सूर्य सप्तमी इस बार विशेष रूप से चर्चा में रही, क्योंकि राज्य सरकार ने आदेश जारी कर इसके उपलक्ष्य में सरकारी व निजी स्कूलों में सूर्य नमस्कार का आयोजन किया। ये आयोजन सूर्य सप्तमी से एक दिन पूर्व स्कूलों में किया गया क्योंकि 16 फरवरी यानी सूर्य सप्तमी के दिन देवनारायण जयंती का अवकाश है। ये एक नई पहल है, लेकिन इससे आमजन और विद्यार्थियों को सूर्य सप्तमी और सूर्य नमस्कार के बारे में जानकारी हुई। इस दिन शिक्षा विभाग ने सामूहिक सूर्य नमस्कार का रेकॉर्ड बनाने का प्रयास किया है।