
गुलाब कोठारी, प्रधान संपादक, पत्रिका समूह
राजस्थान विद्यापीठ विवि में कर्पूर चन्द्र कुलिश शोध संस्थान के स्थापना समारोह में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि पत्रकारिता को समझना है तो उसके पीछे के संकल्प और भावना को समझना होगा। मां बनने के लिए स्त्री होना जरूरी नहीं, संवेदनशील होना जरूरी है। पाठक को सम्मान देना पत्रकारिता का धर्म है। सिर्फ बुद्धि से चलने वाली कलम किसी के काम नहीं आती। पत्रकार को सबसे पहले संवेदनशील इंसान बनना होगा। उसे समाज के लिए जीना होगा। बीज की तरह मिट्टी में गढ़ना होगा, यह चिंता किए बिना कि फल कौन खाएगा। दीप प्रज्वलन और अतिथि सत्कार के बाद कुलगीत और लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। कुलिश जी की जीवन यात्रा पर लघु फिल्म दिखाई। इस मौके पर कलक्टर गौरव अग्रवाल आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. राहुल जैन, पूर्व प्राचार्य डॉ. विपिन माथुर, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपालसिंह, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता पंकज शर्मा, डॉ. आनंद गुप्ता, सिंधी समाज (जेएसपी) अध्यक्ष हरीश राजानी, पेंशनर्स समाज अध्यक्ष भंवर सेठ, इंजीनियर वाईक बोलिया, राजेश अग्रवाल सहित शहर के गणमान्य मौजूद रहे।
कोठारी ने कहा कि अखबार और जीवन दोनों भरोसे पर टिके हैं। अभिव्यक्ति केवलं शरीर, मन या बुद्धि की नहीं, आत्मा की होती है। शरीर, मन और बुद्धि केवल माध्यम हैं। आत्मा से आत्मा का संवाद ही पत्रकारिता का वास्तविक स्वरूप है। बाउसा ने सामाजिक शिक्षा का जो दौर शुरू किया, वह आज भी जीवित है और उसी सिद्धांत पर यह परंपरा खड़ी है।
कोठारी के अनुसार आज सबसे बड़ा संकट है कि पत्रकार सरकार के साथ खड़ा होता है। वह लोगों के संघर्ष से दूर होगा तो सामाजिक समस्याओं को कैसे रखेगा। राजस्थान पत्रिका का इतिहास संघर्ष की पत्रकारिता का है। अखबार के लिए दो ताकतें जरूरी हैं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संघर्ष का साहस। जो सोते हुए भी जागृत रहे, वही सच्चा पत्रकार है।
कोठारी ने कहा कि पत्रकार की पहली जिम्मेदारी समाज को देना, उसकी समस्याओं का समाधान करना है। कुलिश जी किसी एक व्यक्ति की पीड़ा को भी अभियान बना देते थे और समाधान होने तक संघर्ष करते थे। किसी मुद्दे को उठाने के बाद उसे अंतिम निर्णय तक पहुंचाना ही सच्ची पत्रकारिता है। इसके लिए पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं. संकल्प बनाना होगा।
कुलिशजी के जीवन, विचार व पत्रकारिता सिद्धांतों पर शोध और अध्ययन को प्रोत्साहन
पत्रकारिता अध्ययन व सरोकार से जुड़े विषयों पर आयोजन होंगे
कुलिशजी के पत्रकारिता मूल्यों के संकलन व अभिलेखीकरण का कार्य
विद्यार्थियों में नैतिक एवं जनोन्मुख पत्रकारिता मूल्य विकसित हो सकेंगे
मीडिया, समाज व भारतीय ज्ञान-परम्परा के अंतर्संबंधों पर अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा
कोठारी ने कहा कि नई पीढ़ी का विश्वास परिवार और मूल्यों से दूर होता जा रहा है। कारण शिक्षा से धर्म और संवेदना का अलग हो जाना भी है। हमारी शिक्षा, राजनीति, संविधान और पत्रकारिता सब धर्मनिरपेक्ष हो गए। जीवन के मूल पुरुषार्थों से धर्म निकल जाए तो मोक्ष भी खत्म हो जाता है। केवल अर्थ और लाभ पर न समाज टिक सकता है और न पत्रकारिता।
कोठारी ने कहा कि एक समय संचार के साधन नहीं थे, तब अखबार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज को दिशा देते थे। स्वतंत्रता आंदोलन सबसे बड़ा उदाहरण है। लालटेन की रोशनी में हाथ से अखबार लिखते और प्रतियां दूर-दराज तक पहुंचाते थे। हम आज भी उनको सम्मान देते हैं, क्योंकि उनकी पत्रकारिता के पीछे समाज और राष्ट्र के लिए समर्पण भाव था।
Updated on:
22 May 2026 03:10 pm
Published on:
22 May 2026 02:38 pm
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