- ठेके के चिकित्सकों के हवाले कई काम - प्रतिदिन 100 की ओपीडी व 25 आईपीडीग्राउंड रिपोर्ट
बड़ी स्थित संभाग का सबसे बड़ा टीबी अस्पताल अब दो नियमित चिकित्सक के भरोसे हैं। यहां सभी छह जिलों के साथ ही मध्यप्रदेश के कई जिलों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में नियमित चिकित्सकों की कमी से मरीजों को भी परेशानी हो सकती है। वर्तमान में यहां मौजूद चिकित्सकों पर अन्य विभागीय कार्य का भार भी बढ़ता जा रहा है। खास बात ये है कि अब भी यहां दो एसोसिएट व दो प्रोफेसर के पद रिक्त हैं। यहां कार्यरत हॉस्पिटल अधीक्षक, विभागाध्यक्ष व आरएनटी उपाचार्य डॉ. महेन्द्र कुमार बनेड़ा का जयपुर तबादला हो गया है।
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100 मरीज रोज आते हैं
टीबी हॉस्पिटल में प्रतिदिन 100 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। 25 मरीज भर्ती होते हैं। यहां वर्तमान में तीन फैकल्टी सदस्य डॉ. मनोज आर्य, डाॅ. महेश महीच (दोनो यूटीबी) पर लगे हुए हैं। डॉ. नेहा डामोर सहायक आचार्य व डॉ. अरुणबाला चौहान सीनियर स्पेशलिस्ट दोनों नियमित है, लेकिन मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी में चौहान शामिल नहीं हैं।
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रेजिडेंटस के भरोसे नहीं छोड़ सकतेटीबी विभाग में रेजिडेंट चिकित्सक 23 है, लेकिन पूरी तरह से ओपीडी को इनके भरोसे नहीं छोड़ा जाता। मौजूद दो नियमित व दो तदर्थ चिकित्सकों को अन्य विभागीय कार्य भी करने पड़ते हैं, ऐसे में मरीजों को परेशानी होती है। फाइनल इयर के रेजिडेंट्स की परीक्षाएं होनी है, तो ये काम इन्हीें चिकित्सकों को निपटाना है।
इनका कहना हैहमने चिकित्सकों की मांग कर रखी है। कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन डॉ. घनश्याम से बात करके ही डॉ. महेन्द्र को यहां से रिलीव किया है। फिलहाल एमसीआई के निरीक्षण के लिए भी चिकित्सकों की संख्या पूरी होनी चाहिए।
डॉ. लाखन पोसवाल, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज