उदयपुर

उदयपुर के इस पटवार घर पर हर समय मंडराता ‘मौत का साया

राजस्व रिकॉर्ड पर संकट, मौन है प्रशासन, हर समय बनी रहती है जर्जर छत गिरने की आशंका
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उदयपुर के इस पटवार घर पर हर समय मंडराता 'मौत का साया

उदयपुर/ कानोड़. क्षेत्रीय तहसील मुख्यालय पर स्थित पटवार हल्का कार्यालय इन दिनों एक मसले को लेकर खासा चर्चा में है। ड्यूटी अवधि बिताने वाले पटवारी से लेकर राजस्व कामकाज को आने वाला हर आम इंसान इस पटवार घर के भीतर घुसने से कतराता है। इसकी वजह किसी भूतहा फिल्म की कहानी से जुड़ी हुई नहीं है, बल्कि जर्जर हो चुकी इमारत और उसकी छत है। मानसून की दस्तक के साथ आते अंधड़ और झमाझम बारिश से इस भवन की छत गिरने की आशंकाएं गहरा रही हैं। आलम यह है कि 14 हजार की आबादी वाले कस्बे के एक मात्र पटवार घर में पटवारी जैसे तैसे उसकी ड्यूटी अवधि बिताता है। भवन की जर्जर हालत जानने वाला व्यक्ति अक्सर पटवारी को भवन के बाहर बुलाकर ही बात करता है। स्थानीय किसानों की बात पर यकीन करें तो राजस्व के सिलसिले में उनके पटवार घर में दाखिल होते ही कई बार छत का प्लास्टर गिरा है। हालांकि किसी के गंभीर जख्मी होने जैसे समाचार नहीं हैं।

जोखिम भरी नौकरी
राजस्व नियमों के तहत मानसून पूर्व जर्जर हो चुकी इमारतों को सूचीबृद्ध करने वाले राजस्व कार्मिक पटवारी खुद की इमारत की जर्जरता को लेकर मौन साधे हुए है। बेमन से भयभीत होकर प्रशासनिक आदेश की पालना में पटवारी यहां ड्यटी अवधि का समय काटता है। पटवार घर के पीछे शौचालयों के बने होने से हवा के साथ आने वाली दुर्गंध भी यहां बैठने वाले लोगों को चुनौती देती रहती है।

2016 के बाद बेसुध!
वर्ष 2016 में तत्कालीन तहसीलदार ने पटवार घर की बदहाली देखकर इसे अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए प्रशासनिक पत्र आगे बढ़ाया था, लेकिन उनके जाने के साथ ही कार्यालय स्थांन्तरण की प्रक्रिया भी थम गई। इसके बाद आने वाले किसी अधिकारी ने बदलाव की जहमत नहीं उठाई।

रिकॉर्ड भी असुरक्षित
हकीकत यह है कि बरसात के दिनों आवश्यक रिकॉर्ड को भी पटवार घर में नहीं रखा जा सकता। बरसात में टपकती छत से रिकॉर्ड खराब होने का अंदेशा रहता है। ऐसी परिस्थिति में पटवारी को रिकॉर्ड या तो घर लेकर जाना होता है या फिर उसे तहसील कार्यालय में रखने का विकल्प होता है। रिकॉर्ड में इस भवन को पटवारी के लिए सरकारी आवास भी माना हुआ है। दूसरी खामी यह भी है कि कार्यालय में हर समय अंधेरा पसरा रहता है।

आजादी के बाद से नहीं हुई मरम्मत
आजादी के बाद से पटवार भवन की मरम्मत नहीं हुई है। बरसात में पटवारी का इस भवन में रूकना भी जोखिम भरा है। विभाग को भवन नवीनीकरण पर ध्यान देना चाहिए।
अनिल कुमार शर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका कानोड़

हर समय आशंका
पूरा भवन जर्जर है। कभी भी यह नीचे गिर सकता है। कनिष्ठ अभियंता की रिपोर्ट के साथ प्रस्ताव भेजे हुए हैं। एक कमरे में पटवार भवन चलता है, जो कि पर्याप्त नहीं है।
जितेन्द्र पारीक, पटवारी हल्का कानोड़

जल्द होगी मरम्मत
पटवार भवन की जर्जर हालत की मुझे जानकारी नहीं है। ऐसा है तो पीडब्ल्यूडी से रिपोर्ट लेकर दुरस्त कराएंगे।
गोपाल परिहार , एसडीएम वल्लभनगर

Published on:
25 Jun 2019 06:00 am