उदयपुर

तपती सड़क, थका बचपन, 40 डिग्री में 3 किमी पैदल घर लौटती बच्चियां

कंधों पर भारी बस्ते और चेहरों पर थकान लिए ये नौनिहाल 2 से 3 किमी तक पैदल सफर करने को मजबूर हैं। सवाल सिर्फ गर्मी का नहीं, बल्कि उन फैसलों का है जो दफ्तरों में बैठकर लिए जाते हैं, लेकिन जिनका बोझ सीधे बच्चों पर पड़ रहा है। प्रदेश में भीषण गर्मी को देखते हुए जयपुर, जैसलमेर, चित्तौड़गढ़, कोटा और दौसा सहित कई जिलों में स्कूल समय में बदलाव किए गए हैं। कहीं समय घटाया गया तो कहीं सुबह की पारी को प्राथमिकता दी गई लेकिन उदयपुर में अभी कुछ नहीं किया गया।

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Apr 26, 2026
source patrika photo

दूसरी पारी के स्कूलों में बच्चे परेशान] पहली पारी का समय घटा, लेकिन दोपहर 12:30 से 6 बजे तक स्कूल जाने को मजबूर छोटे बच्चे, लू के बीच घर लौटते नौनिहालों की तस्वीरें झकझोर रही

उदयपुर. दोपहर की झुलसाती धूप, 40 डिग्री के आसपास पहुंचता तापमान और तपती सड़कों पर स्कूल ड्रेस में घर लौटते छोटे-छोटे बच्चे यह तस्वीर सिर्फ एक दिन की नहीं, बल्कि कई जिलों की रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी है। कंधों पर भारी बस्ते और चेहरों पर थकान लिए ये नौनिहाल 2 से 3 किमी तक पैदल सफर करने को मजबूर हैं। सवाल सिर्फ गर्मी का नहीं, बल्कि उन फैसलों का है जो दफ्तरों में बैठकर लिए जाते हैं, लेकिन जिनका बोझ सीधे बच्चों पर पड़ रहा है। प्रदेश में भीषण गर्मी को देखते हुए जयपुर, जैसलमेर, चित्तौड़गढ़, कोटा और दौसा सहित कई जिलों में स्कूल समय में बदलाव किए गए हैं। कहीं समय घटाया गया तो कहीं सुबह की पारी को प्राथमिकता दी गई लेकिन उदयपुर में अभी कुछ नहीं किया गया।

दूसरी पारी अब भी परेशानी की जड़

यह राहत मुख्य रूप से एकल पारी वाले स्कूलों तक सीमित है। दूसरी पारी में पढ़ने वाले छोटे बच्चे अब भी दोपहर की भीषण गर्मी में स्कूल जाने और लौटने को मजबूर हैं। उदयपुर जैसे जिलों में अब तक कोई ठोस बदलाव लागू नहीं किया गया है, जिससे स्थिति और गंभीर बनी हुई है। दूसरी पारी के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ज्यादातर नर्सरी से लेकर कक्षा आठ तक के होते हैं, यानी सबसे कम उम्र के ये बच्चे है।

लू, डिहाइड्रेशन और थकावट का बढ़ता खतरा

दोपहर 12:30 बजे से शाम 6 बजे तक के समय में तापमान अपने चरम पर होता है। ऐसे में बच्चों को लू लगने, डिहाइड्रेशन, चक्कर और थकावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

जमीनी हकीकत हजारों बच्चे झेल रहे गर्मी की मार

उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों के कुछ स्कूलों में ही 1500 से अधिक बच्चे दूसरी पारी में पढ़ रहे हैं। एमजीजीएस पायड़ा में 195, सिंधी भाषाई विद्यालय प्रतापनगर में 92, एमजीजीएस पडूना में 398, बड़ी उन्दरी में 295 और नागानगरी में 50 छात्र शामिल हैं। वहीं अजमेर के रायपुर (ब्यावर) में 275 और जोधपुर के आसोप में 265 छात्र इस तपती दोपहर में स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं।

कागजों में अलग, जमीन पर अलग सच्चाई

कागजों में पहली पारी सुबह 7:30 से 1 बजे तक और दूसरी पारी सुबह 7 से शाम 6 बजे तक दर्शाई जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि छोटे बच्चों को दिन के सबसे खतरनाक समय में स्कूल जाना पड़ रहा है।

फैसलों में बदलाव जरूरी- दूसरी पारी को सुबह में शिफ्ट किया जाए

छोटे बच्चों के लिए विशेष अवकाश या समय में बदलाव- पानी, छाया और परिवहन की उचित व्यवस्था

हीटवेव को लेकर राज्य स्तर पर एक समान गाइडलाइन

दूसरी पारी के स्कूल तुरंत सुबह में किए जाएं। छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं होना चाहिए।

शेर सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ

Published on:
26 Apr 2026 05:52 pm
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