
रोहित सोनी। फोटो पत्रिका नेटवर्क
Motivational story Rajasthan : उदयपुर। कभी शब्दों को सही ढंग से बोलने में संघर्ष करने वाला एक ग्रामीण युवक आज अपनी आवाज और अभिव्यक्ति के दम पर सोशल मीडिया पर मेवाड़ की पहचान बन चुका है। मंगलवाड़ क्षेत्र स्थित मोरवन गांव के रहने वाले रोहित सोनी ने साबित कर दिया कि अगर आत्मविश्वास, निरंतर अभ्यास और संस्कृति के प्रति लगाव हो तो हर कमजोरी ताकत में बदली जा सकती है।
रोहित सोनी आज सोशल मीडिया पर 'आर्मी बॉय रोहित' के नाम से जाना जाता है। भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे रोहित की कहानी संघर्ष, धैर्य और सफलता का ऐसा उदाहरण है जो युवाओं को प्रेरित करता है। रोहित बताते है कि बचपन में उसे स्पष्ट बोलने में परेशानी होती थी। लोग उसे चिढ़ाते थे। कई बार मंच पर बोलने से डरता था। लेकिन, उसने कभी हार नहीं मानी। परिवार की आस्था और स्वयं के निरंतर अभ्यास ने उसमें आत्मविश्वास जगा। धीरे-धीरे कमजोरी पर काम किया और आज वही बोलने की कला उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।
रोहित का बचपन गांव में बीता। 12वीं तक की पढ़ाई गांव में पूरी करने के बाद भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देखा। 7वीं कक्षा में गांव के एक युवक को सेना की वर्दी में देखकर मन में देश सेवा का जुनून पैदा हुआ। बाद में अग्निवीर भर्ती में सफलता पाकर सेना में स्थान बनाया।
कोरोना काल के दौरान रोहित ने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना शुरू किया। शुरुआती तीन साल तक उसे उम्मीद जितनी सफलता नहीं मिली। न अच्छा मोबाइल था, न कैमरा, न माइक और न ही कोई टीम थी। इसके बावजूद वह डटा रहा और लगातार वीडियो बनाता रहा।
-पहले हिंदी में कंटेंट बनाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। मन में विचार आया कि क्यों न मेवाड़ी में कंटेंट बनाया जाए। यही निर्णय टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
-मेवाड़ी भाषा, संस्कृति और राजस्थानी अस्मिता को लेकर बनाए गए वीडियो खासे लोकप्रिय हैं। इसके बाद रोहित ने मुड़कर नहीं देखा और मेवाड़ी में ही कंटेंट बनाने लगा।
-रोहित ने अपने आदर्श महाराणा प्रताप पर एक शायरी लिखकर पोस्ट की। वीडियो वायरल हो गया। आज इंस्टाग्राम पर 47 हजार फॉलोअर्स हैं।
-रोहित कहता है कि संस्कृति को बचाए रखना जरूरी है। हिंदी, अंग्रेजी सीखना अच्छी बात है, लेकिन जड़ों से जुड़े रहना सबसे अहम बात है।
-सफलता चाहिए तो कमजोरी को बहाना नहीं बनाएं। मेहनत करें, लगातार सीखते रहें और संस्कृति पर गर्व करें। जो आज रोक रहा है, वही कल सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
-नशा युवाओं को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रहा है। माता-पिता बच्चों की संगत पर ध्यान दें। परिवार का अनुशासन और संस्कार युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से बचा सकते हैं।
-बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत चिंता का विषय है। बच्चों को मोबाइल के बजाय खेल, किताबें, प्रकृति और समाज से जोड़ें। माता-पिता खुद उदाहरण बने तो बच्चे भी अच्छी आदतें सीखेंगे।
Published on:
14 Jun 2026 05:19 pm
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