उदयपुर

Sohrabuddin-Tulsi Encounter Case : तुलसी का भांजा बोला ‘एमएन ने धमकाया था’

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Sep 04, 2018
sohrabuddin-tulsi encounter case
Sohrabuddin-Tulsi Encounter Case : कोर्ट में डिब्बा खोला तो निकली चार गोलियां, पहले बताई थी दो

मो. इल‍ियास/ उदयपुर . बहुचर्चित सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर प्रकरण में मुंबई में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में कई पेशियां चूकने के बाद सोमवार को तुलसी का भांजा कुंदन बयान देने पहुंचा। कुंदन प्रजापति ने बयानों में बताया कि पुलिस ने मामा तुलसी को फर्जी मुठभेड़ में मारा था, क्योंकि वह सोहराबुद्दीन व उसकी पत्नी कौसर के केस का चश्मदीद गवाह था। तुलसी ने मुझे जेल रहते हुए अंदेशा जताया था कि पुलिस उसे मार सकती है। इस संबंध में उसने कई जगह शिकायत भी भेजी। कुंदन ने बयानों में तत्कालीन एसपी दिनेश एम.एन. सहित उदयपुर टीम का नाम भी लिया। एेसे में कुंदन के बयान मामले में बरी हो चुके दिनेश एम.एन. के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।

पुलिस ने 25 दिन रखा था अवैध हिरासत में

कुंदन ने कोर्ट को बताया कि तुलसी उसका बड़ा मामा था। वह उदयपुर में हमीद लाला हत्याकांड में जेल में बंद हुआ था। तब वह उससे कई बार मिलने उदयपुर जेल आया। उसके अलावा मामा को जब भी उज्जैन पेशी पर लाते थे तब नानी नर्मदादेवी मिलने गया था। हमीद लाल हत्याकांड में मामा तुलसी के साथी आजम और बंटी के अलावा वह उनके किसी दोस्त को नहीं जानता। मैं मेरे दोस्ते विमल के साथ मामा से मिलने उदयपुर सेंट्रल जेल गया था, तो मामा ने रेलवे स्टेशन मिलने आने का कहा था। हम रेलवे स्टेशन गए तो मामा वहां डिब्बे में बैठा था, उनके साथ आजम भी था। मामा ने कहा कि टिकट लेकर दूसरे डिब्बे में बैठ जाओ और साथ चलो। मैं मेरे दोस्त के साथ बुकिंग काउंटर पर टिकट लेने गया तो हमें पुलिस ने पकड़ लिया। उसके बाद पुलिस ने हमें भूपालपुरा, सूरजपोल, सलूम्बर, सराड़ा व इसवाल चौकी सहित अलग-अलग थानों में 25 दिन अवैध हिरासत में रखा।


मामा को पेशी पर ले गए तब हम जेल में थे
कुंदन ने आगे बयानों में बताया कि एसपी दिनेश एमएन ने कहा था तुम यहां क्यों आए, तुमने हमारा काम बिगाड़ा है। तुलसी के साथ इन्हें भी मार देते है। कुंदन ने बताया कि अवैध हिरासत के दौरान एसपी दिनेश एम.एन.,सीआई अब्दुल रहमान, नारायणसिंह, कांस्टेबल तेजसिंह, करतार, युद्धवीर सहित अन्य पुलिसकर्मी आते थे और मारपीट करते थे। कुंदन ने आगे बताया कि २५ दिन बाद पुलिस ने मुझे व दोस्त विमल को स्मैक का फर्जी केस बनाकर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल में मामा तुलसी व उनके साथी भी थे। जेल में मामा ने बताया कि पुलिस ने सोहराबुद्दीन को फर्जी मुठभेड़ में मारा था। मैं चश्मदीद गवाह हूं, इसलिए पुलिस मुझे भी मारना चाहती है। पुलिस २५ नवम्बर 2006 को मामा तुलसी को अहमदाबाद पेशी पर लेकर गई थी तब हम जेल में ही थे। आजम को किसी अन्य फर्जी केस में ले गई थी, इसलिए उसे मामा के साथ पेशी पर नहीं ले गए थे। मामा ने जान का खतरा होने का अंदेशा जताया था और कहा था कि मैने कई जगह इस संबंध में एप्लीकेशन दे रखी है, तो पुलिस कुछ नहीं करेगी। बाद में हमें सूचना मिली कि पुलिस ने मामा तुलसी को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया।


किए सवाल तो आया विरोधाभास

बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर कुंदन ने बताया कि सीबीआई अधिकारी राजीव चंडोला ने मेरा बयान लिया था, लेकिन मुझे कभी पढक़र नहीं सुनाया गया। बयान में क्या लिखा, सच या झूठ मुझे यह भी नहीं पता। सीबीआई को मैंने बताया था कि मैं तुलसीराम के दोस्तों को नहीं जानता, न ही पहचानता हूं। सीबीआई को मैंने एेसा कभी नहीं कहा कि मामा ने जेल में रहकर खुद को सोहराबुद्दीन केस के गवाह होने के बारे में बताया हो। कुंदन ने बताया कि तुलसी व सोहराबुद्दीन दोस्त थे, मुझे तो यह भी नहीं पता था। वे दोस्त थे एेसा मैंने सीबीआई को कभी नहीं बताया। रूबाबुद्दीन का नाम भी कभी नहीं सुना, न मिला, न जातना हूं। २५ दिन की अवैध हिरासत को लेकर बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर कुंदन ने बताया कि रिमांड के लिए कोर्ट में पेश करते समय या जमानत के दौरान भी मैंने इसकी जानकारी कभी कोर्ट को नहीं दी, न ही सीबीआई को इसके बारे में कुछ बताया।

Published on:
04 Sept 2018 12:38 pm