Udaipur Brain Dead Farmer : एक ब्रेन डेड मरीज तीन गंभीर बीमार मरीजों के लिए देवदूत बन गया। उसकी मृत्यु के बाद उसके लीवर व 2 किडनियों से 3 जिंदगियां बचा ली गई। उसने गंभीर बीमार मरीजों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने का काम किया। इस अंगदान के बाद भी वह अपने मरने के बाद भी जिंदा रहेगा।
Farmer becomes Angel : उदयपुर की धरा भी आज अंगदान कर धन्य हो गई। ब्रेन डेड मरीज के परिजनों की सहमति के बाद यहां आरएनटी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने पहला अंगदान ऑपरेशन किया। जिसमें मरीज के शरीर से लीवर व दो किडनियां दान की गई। इससे तीन जिंदगियां बचाई जा सकेगी। यह तीनों अंग ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जयपुर में एसएमएस व महात्मा गांधी चिकित्सालय भेजे गए हैं। जहां ऑपरेशन कर रोगियों के अंग प्रत्यारोपित किए जाएंगे। आरएनटी मेडिकल कॉलेज में अंगदान का यह पहला ऑपरेशन था। जिसमें मध्यप्रदेश के नीमच निवासी माणकलाल (56 वर्ष) पुत्र केसूलाल पाटीदार के अंगदान किए गए। परिजनों ने उनके समस्त अंगों के दान की सहमति जताई थी। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने इसको लेकर देश के अलग.अलग मेडिकल कॉलेज को जानकारी दी थी। उसके बाद हैदराबाद के किम्स व जयपुर के एसएमएस व महात्मा गांधी चिकित्सालय की टीमें यहां पहुंची।
चेन्नई की टीम ने नहीं लिया रिस्क
लेकिन चेन्नई की टीम रास्ते में ही रुक गई। उन्हें रेस्पिरेंट सुटेबल नहीं मिला। वे दस साल की बच्ची के लिए हार्ट चाहते थे, लेकिन मरीज की उम्र 56 साल थी, उन्होंने इसको लेकर जोखिम नहीं उठाया।
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एक दिन पहले ब्रेन डेड घोषित किया
मृतक माणक लाल खेतीहर किसान था। 15 दिसम्बर को ब्लड प्रेशर हाई होने पर उसके ब्रेन में समस्या हो गई थी। उसे परिजनों ने यहां निजी चिकित्सालय में दिखाया था। जहां ऑपरेशन किया गया। सात दिन घर पर रहने के बाद 15 जनवरी को वापस तबीयत खराब होने पर परिजन आरएनटी के सुपर स्पेशलियिटी यूनिट में लेकर पहुंचे। यहां उपचार के बाद बुधवार शाम मरीज का ब्रेन डेड घोषित किया।
परिजनों की सहमति पर अंग लिए गए
उसके बाद परिजनों की सहमति पर अंग लिए गए। इन अंगों को गुरुवार शाम ग्रीन कॉरिडोर से डबोक एयरपोर्ट ले जाया गया जहां से वायुयान से जयपुर रवाना किया गया।
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