
राजस्थान के सुरक्षा तंत्र और जेल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी खबर उदयपुर से सामने आई है। उदयपुर सेंट्रल जेल में बंद कुख्यात हिस्ट्रीशीटर और 35 गंभीर मुकदमों के आरोपी नरेश हरिजन की सेल में जब पुलिस ने अचानक सर्च अभियान चलाया, तो वहां का नजारा देखकर खुद पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। सोमवार, 14 सितंबर को एडिशनल एसपी के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम की छापेमारी के दौरान नरेश की सेल से किसी सामान्य बंदी की तरह नहीं, बल्कि एक वीवीआईपी की तरह सुख-सुविधाओं का सामान बरामद हुआ। बदमाश की सेल में बकायदा टीवी, चाय और गर्म पानी बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हा और बातचीत के लिए कीपैड मोबाइल मिला। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि जेल की निगरानी के लिए लगाई गई सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी उसी की सेल में रखी हुई थी, जिससे वह अपना मोबाइल चार्ज कर रहा था। पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से जेल प्रशासन और बंदियों के बीच हड़कंप मच गया है।
उदयपुर पुलिस को लंबे समय से यह सूचनाएं मिल रही थीं कि सेंट्रल जेल के भीतर से कुछ रसूखदार और कुख्यात अपराधी मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल कर बाहर अपनी आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं। इन इनपुट्स के आधार पर एडिशनल एसपी के नेतृत्व में पुलिस की एक विशेष टीम ने बिना कोई पूर्व सूचना दिए सोमवार को जेल में अचानक दबिश दी।
पुलिस टीम ने अलग-अलग बैरकों और हाई-सिक्योरिटी सेल की गहन तलाशी ली। जैसे ही टीम कुख्यात बदमाश नरेश हरिजन की सेल में पहुंची, वहां मौजूद सुविधाएं देखकर अधिकारी दंग रह गए। पुलिस को अचानक अपनी सेल के सामने देखकर कुख्यात नरेश के भी होश उड़ गए और उसकी जमीन खिसक गई।
उदयपुर सेंट्रल जेल की इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की पूरी तरह पोल खोलकर रख दी है। जेल में बंद सामान्य कैदियों को जहां बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है, वहीं एक इनामी और हिस्ट्रीशीटर को लग्जरी लाइफस्टाइल मुहैया कराई जा रही थी:
टीवी और इंडक्शन का इंतजाम: नरेश हरिजन की सेल में मनोरंजन के लिए रंगीन टीवी लगा हुआ था। इसके अलावा चाय बनाने और पीने का पानी गर्म करने के लिए इंडक्शन चूल्हा रखा गया था।
कीपैड मोबाइल और कनेक्टिविटी: सेल में एक कीपैड मोबाइल मिला, जिसका उपयोग वह जेल के अंदर से ही बाहर अपने गुर्गों से बातचीत करने और गिरोह संचालित करने के लिए कर रहा था।
DVR से मोबाइल चार्जिंग: सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जेल की सुरक्षा और निगरानी के लिए जिस सीसीटीवी सिस्टम की डीवीआर लगाई गई थी, वह उसी की सेल में रखी थी। आरोपी उसी डीवीआर के पावर पॉइंट से अपना मोबाइल फोन चार्ज कर रहा था।
उदयपुर का नरेश हरिजन कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि वह उदयपुर के सूरजपोल थाने का पुराना और बेहद खतरनाक हिस्ट्रीशीटर है:
35 से अधिक गंभीर मामले: अप्रैल 2025 तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नरेश हरिजन पर हत्या, रंगदारी (फिरौती), अपहरण और जानलेवा हमले समेत 35 से ज्यादा संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
प्रवीण पालीवाल हत्याकांड का सूत्रधार: वर्ष 2014 में हुए बहुचर्चित प्रवीण पालीवाल हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार नरेश हरिजन ही था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।
जयपुर से बुलाई थी सुपारी किलर की टीम: उस पर आरोप है कि उसने उदयपुर के प्रवीण वसीटा की हत्या के लिए जयपुर के शातिर बदमाश इमरान उर्फ सरिया को 3.5 लाख रुपये की सुपारी देकर उदयपुर बुलवाया था।
पेट्रोल पंप डकैती की साजिश: दिसंबर 2023 में पुलिस ने नरेश और उसके 8 अन्य साथियों को भारी मात्रा में अवैध हथियारों के साथ दबोचा था, जब वे एक पेट्रोल पंप पर डकैती और हत्या की बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे।
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि जेल में हर महीने होने वाली नियमित प्रशासनिक जांच के बावजूद यह वीवीआईपी व्यवस्था लंबे समय से कैसे चल रही थी।
सूत्रों के अनुसार, जब भी जेल में किसी वरिष्ठ अधिकारी या बाहरी टीम के निरीक्षण का अंदेशा होता था, तो जेल कर्मचारियों की मिलीभगत से नरेश की सेल को तुरंत बदल दिया जाता था। इस चालाकी के कारण जांच टीमों को कभी भी उसकी सेल की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पाता था। लेकिन सोमवार को हुई इस अचानक कार्रवाई ने इस पूरे खेल को बेनकाब कर दिया।
सेंट्रल जेल परिसर में जैमर और कड़े पहरे के बावजूद मोबाइल का पहुंचना, बिजली से चलने वाले इंडक्शन और टीवी का इंस्टॉल होना और सबसे बढ़कर सीसीटीवी डीवीआर का किसी कैदी की सेल में होना जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा धब्बा है।
स्थानीय नागरिकों और कानून विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जेल कर्मचारियों और अधिकारियों की शह के इतना बड़ा सामान हाई-सिक्योरिटी बैरक तक नहीं पहुंच सकता। उदयपुर पुलिस ने जब्त सामान को कब्जे में लेकर मामला दर्ज कर लिया है और अब यह जांच की जा रही है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में जेल के कौन-कौन से कर्मचारी शामिल थे।