उदयपुर

उदयपुर : बच्चों का खाली समय खा रहा मोबाइल, बंद हो रहे खेल और बातचीत के रास्ते

बच्चों के खाली समय में मोबाइल और टैबलेट का बढ़ता इस्तेमाल उनके खेल, बातचीत और रचनात्मक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है। बोरियत, रोने या खाना खिलाने के दौरान मोबाइल देना कई घरों में सामान्य हो गया है। इससे बच्चे खुद खेल या काम खोजने की बजाय स्क्रीन पर निर्भर होने लगते हैं। बाहर खेलने का समय घटने से शारीरिक सक्रियता और सामाजिक व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है।
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Sep 19, 2026
habit of moblie phones
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उदयपुर. बच्चों को जैसे ही थोड़ा खाली समय मिलता है, वे मोबाइल या टैबलेट मांगने लगते हैं। घर में बैठे हैं तो कार्टून, खाना खाते समय वीडियो और पढ़ाई खत्म होते ही गेम। बोरियत दूर करने के लिए मोबाइल देना अब कई घरों में आम हो गया है। इससे बच्चों के दिन का वह समय कम हो रहा है, जिसमें वे खेलते, बातें करते या खुद कुछ नया करने की कोशिश करते थे। पहले बच्चे खाली समय में बाहर खेलने चले जाते थे। घर में रहते तो खिलौनों से खेलते, चित्र बनाते या भाई-बहन और दोस्तों के साथ समय बिताते थे। अब मोबाइल पर हर समय वीडियो और गेम आसानी से मिल जाते हैं। इसलिए बच्चे को खाली बैठकर खुद कोई खेल या काम सोचने की जरूरत कम पड़ती है।

बच्चा बोर हुआ तो हाथ में मोबाइल

बच्चा रोए या जिद करे तो उसे चुप कराने के लिए मोबाइल देना आसान लगता है। खाना खिलाते समय भी कई अभिभावक मोबाइल पर वीडियो चला देते हैं। बच्चा शांत हो जाता है, इसलिए यह तरीका बार-बार इस्तेमाल होने लगता है। धीरे-धीरे बच्चे को बोरियत होते ही मोबाइल याद आने लगता है।

खुद खेलने का समय घट रहा

मोबाइल पर वीडियो देखने में बच्चे को सब कुछ तैयार मिलता है। उसे कहानी बनाने या खेल सोचने की जरूरत नहीं होती। वहीं जब बच्चा बिना मोबाइल के खेलता है तो उसे खुद तय करना पड़ता है कि क्या खेलना है। वह खिलौनों से नया खेल बना सकता है, चित्र बना सकता है या अपनी कहानी सोच सकता है। यही समय उसकी सोच और कल्पना को बढ़ाने में मदद करता है।

खेलकूद कम हुआ तो शरीर पर असर

मोबाइल पर ज्यादा समय देने से बच्चों के बाहर खेलने का समय भी कम हो सकता है। दौड़ना, साइकिल चलाना और दोस्तों के साथ खेलना बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय रखता है। इसके साथ ही खेल के दौरान बच्चों में एक-दूसरे से बात करने और मिल-जुलकर खेलने की आदत भी विकसित होती है।

हर समय व्यस्त रखना भी जरूरी नहीं

मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ सुरेश गोचर ने बताया बच्चे को कुछ समय अकेले भी रहने दें। वह शुरुआत में कह सकता है मैं बोर हो रहा हूं, लेकिन कुछ देर बाद खुद कोई खेल या काम खोज सकता है। हर खाली मिनट में मोबाइल देना जरूरी नहीं है। बच्चों के लिए थोड़ा खाली समय भी जरूरी है, क्योंकि इसी समय वे खुद सोचना और कुछ नया करना सीखते हैं।

Updated on:
19 Sept 2026 05:46 pm
Published on:
19 Sept 2026 05:46 pm