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उदयपुर : वाणी को बाण नहीं, वीणा की तरह करें उपयोग : मुनि अरहसागर

दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म मनाया गया। विभिन्न मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, पूजा और प्रवचन हुए। मुनि अरहसागर ने मन, वचन और कर्म में एकरूपता को आर्जव धर्म का सार बताते हुए वाणी को बाण नहीं, वीणा की तरह उपयोग करने का संदेश दिया। मुनि आदित्य सागर ने माया और कुटिलता छोड़ने का आह्वान किया।
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सेक्टर-11 में मुनि के सान्निध्य में पूजा-अनुष्ठान करते श्रद्धालु। 

उदयपुर. दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण महापर्व के तहत तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म दिवस मनाया। इस मौके पर विभिन्न मंदिरों में पूजा अर्चना हुई। शनिवार को उत्तम शौच धर्म की पूजा होगी। इसका अर्थ लोभ का त्याग करना और मन तथा शरीर की पवित्रता व संतोष अपनाना है। अशोक नगर स्थित उदासीन आश्रम के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनि अरहसागर एवं मुनि सुहित सागर के सान्निध्य में आयोजन हुए।

चातुर्मास समिति अध्यक्ष महेंद्र टाया ने बताया कि धर्मसभा में मुनि अरहसागर ने कहा कि व्यक्ति के मन, वचन और कर्म में एकरूपता होना ही आर्जव धर्म है। कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। मन में कुछ और, वाणी में कुछ और तथा व्यवहार में कुछ और होना मायाचारी और दोहरापन है। वाणी को बाण नहीं, वीणा की तरह करें उपयोग करना चाहिए। श्री पार्श्वनाथ युवा संगठन के अध्यक्ष पंकज ठाकुरडिय़ा ने बताया की रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम "जैन हाउजी" हुआ। विजेताओं को कमेटी ने पुरस्कृत किया।

जीवन में माया, कषाय और कुटिलता को छोड़ो : मुनि आदित्य सागर

सेक्टर-11 स्थित आदिनाथ भवन में विराजित मुनि आदित्य सागर के सान्निध्य में विविध धार्मिक आयोजन चल रहे हैं। चातुर्मास समिति के अध्यक्ष अशोक शाह ने बताया कि जवाहर जैन स्कूल परिसर में बने विशाल डोम पांडाल में हो रहे हैं। धर्मसभा में मुनि आदित्य सागर ने कहा कि जीवन में मायाचारी मत बनो। आज के दिन सभी को यह संकल्प लेना होगा कि हम जीवन में माया कर और कुटिलसर से दूर रहेंगे तभी आज का यह उत्तम आर्जव धर्म दिवस मनाना सफल होगा।

मन, वचन और कर्म की एकरूपता ही आर्जव धर्म का सार : पंडित रविकीर्ति

सेक्टर-14 िस्थत महावीर भवन में सुबह भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए। प्रवचन के दौरान पं. रविकीर्ति ने कहा कि मन, वचन और काया की एकरूपता ही आर्जव धर्म है। मन में जैसा विचार हो, वाणी से भी वैसा ही बोलना और उसी के अनुरूप कर्म एवं आचरण करना सच्चे आर्जव धर्म की पहचान है। महावीर जैन युवा परिषद की ओर से रात में जैनधर्म आधारित नाटक का मंचन किया गया। ट्रस्ट महामंत्री भूरी लाल जैन ने बताया कि 25 सितंबर को समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान होगा। इसमें शै 2025-26 में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक वाले विद्यार्थियों का सम्मान होगा।

बच्चों ने दी सोशल मीडिया के असर की प्रस्तुति

आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर केशवनगर में सुबह भगवान का अभिषेक शांतिधारा एवं पूजा पाठ कर उत्तम आर्जव धर्म मनाया। अध्यक्ष धनपाल जैतावत ने बताया कि शाम को जिनेन्द्र भक्ति हुई। रात्रि में श्रमण संस्कृति सांगानेर की विदुषी बहनों ने दशलक्षण धर्म पर प्रवचन किया। मंदिर में संचालित जैन पाठशाला के बालक-बालिकाओं ने भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर आधारित एवं आज के जीवन में सोशल मीडिया का असर नाटक की प्रस्तुति दी। संचालन बालिका भूमि एवं सोनाक्षी ने किया।

इंद्र ध्वज विधान पूजा असंख्यात गुणी कर्मों की निर्जरा कराती है

पार्श्वनाथ क्रांति युवा संस्थान की ओर से सेक्टर-4 में श्री इंद्र ध्वज महामंडल विधान हुआ। प्रवक्ता मुकेश पांड्या ने बताया कि सीकर में वर्षायोग कर रहे आचार्य वर्धमान सागर का 77वां वर्ष वर्धन दिवस भी मनाया। प्रतिष्ठाचार्य संजय जैन 'सरस' ने विधान की महत्ता बताते हुए कहा कि विधि-विधानपूर्वक की गई जिन पूजा से असंख्यात गुणी कर्मों की निर्जरा होती है और सातिशय पुण्य का बंध भी होता है। रात्रि में देवनंदी कला मंच की ओर से आरे से बने 'चोर' नाटक का मंचन किया गया। आरती, पद्मावती माता की गोद भराई और उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन हुए।