
उदयपुर. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता हित में दो फैसले सुनाए हैं। एक मामले में खराब एसी नहीं बदलने पर कम्पनी और विक्रेता पर जुर्माना लगाया है, वहीं दूसरे मामले में वारंटी में खराब हुई वॉशिंग मशीन की मोटर मुफ्त में बदलने का आदेश दिया है। आयोग अध्यक्ष सुमन गौड़ पाण्डेय व सदस्य मनीष परमार ने फैसलों में विपक्षी की सेवा में कमी मानते हुए कम्पनियों को जिम्मेदार ठहराया है।
इंजीनियर की जांच पर भी नहीं मानी थी कम्पनी
खराब एयर कंडीशनर बेचने और शिकायत के बावजूद उसे ठीक न करने को सेवा में दोष माना है। एसी निर्माता कंपनी टीसीएल इंडिया होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड और विक्रेता कृष्णा मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स को दोषी मानते हुए परिवादी को 27 हजार 999 रुपए ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। प्रकरण के मुताबिक करणपुर वल्लभनगर निवासी प्रह्लाद पाटीदार ने 14 अप्रेल 2025 को डबोक स्थित कृष्णा मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स से टीसीएल कंपनी का एसी 27 हजार 999 रुपए में खरीदा था। महज तीन दिन बाद ही उसमें खराबी आ गई। कंपनी के इंजीनियर ने जांच की तो पहले गैस की कमी बताई, बाद में वॉल्व में मिस्टेक बताई, जो निर्माण दोष है, इसलिए एसी बदलना पड़ेगा। इसके बावजूद कंपनी और विक्रेता ने एसी नहीं बदला। परिवादी ने विधिक नोटिस भिजवाया, लेकिन जवाब नहीं मिला। आखिर परिवादी ने आयोग में परिवाद पेश किया। विपक्षी की ओर से जवाब पेश न होने पर आयोग ने एकपक्षीय कार्रवाई आगे बढ़ाई। आदेश दिया कि विपक्षी 27 हजार 999 रुपए राशि ब्याज सहित डेढ़ माह में अदा करें। मानसिक क्षति व वाद खर्च के रूप में 2000 रुपए अतिरिक्त दें।
5 साल बाद मिली उपभोक्ता को राहत
उपभोक्ता आयोग ने वारंटी अवधि में खराब हुई वॉशिंग मशीन की मोटर न बदलने के मामले में निर्माता कंपनी हेवल्स इंडिया लिमिटेड की सेवा में कमी मानते हुए मोटर मुफ्त में बदलकर देने का आदेश दिया। प्रकरण के मुताबिक गुरुरामदास कॉलोनी निवासी कृष्ण सिंह चौहान ने टाउन हॉल रोड स्थित मैसर्स हिन्द एंटरप्राइजेज से 29 अक्टूबर 2016 को हेवल्स इंडिया लिमिटेड कम्पनी की 8.2 किलो की वॉशिंग मशीन 11 हजार 500 रुपए में खरीदी थी। मशीन पर एक साल की सामान्य वारंटी और मोटर पर 5 साल की विशेष वारंटी थी। वारंटी अवधि में 23 जून 2021 को मशीन अचानक बंद हो गई। परिवादी ने कस्टमर केयर पर शिकायत की, जिस पर तकनीशियन ने मोटर खराब होना बताया और दो दिन में बदलने की बात कही, लेकिन कंपनी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। परिवादी ने 12 जुलाई 2021 को विधिक नोटिस भेजा, जिसका जवाब नहीं दिया तो आयोग में परिवाद पेश किया। सुनवाई में विक्रेता मैसर्स हिन्द एंटरप्राइजेज ने खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार कर दिया। वहीं, कम्पनी ने मशीन के सीरियल नंबर से छेड़छाड़ होना बताकर वारंटी शून्य कर दी। आयोग ने फैसले में विक्रेता को दोष मुक्त करते हुए निर्माता कंपनी को सेवा में कमी का जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने कंपनी को डेढ़ माह में मोटर मुफ्त में बदलकर देने और वाद खर्च के 2000 रुपए अतिरिक्त देने का आदेश दिया।