
जिस पैंथर ने किया किशोर का शिकार वहीं फिर उठा ले गया शव, दहशत के बीच पैंथर को आदमखोर घोषित करने पर अड़े ग्रामीण
मोहम्मद इलियास/उदयपुर/ परसाद
परसाद वननाका क्षेत्र के चणावदा के आइफाफला गांव में सोमवार शाम खेत में खेलते एक किशोर को पैंथर ने शिकार कर मार डाला। शव मिलने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों के नहीं आने पर मौके से शव नहीं उठाया। रात को वनविभाग व पुलिस टीम के साथ देर रात तक वार्ता चली। इस बीच पैंथर उसी जगह फिर से धावा बोलते हुए ग्रामीणों के बीच शव फिर से उठाते हुए पूरी तरह से दहशत फैला गया। रात को डरते हुए ग्रामीण हथियारों व टॉर्च की रोशनी में शव ढूंढऩे निकले तो उन्हें महज 100 मीटर की दूरी पर ही शव मिल गया। मंगलवार सुबह जब इसकी सूचना आसपास के गांव में पहुंची तो सैकड़ों लोग एकत्र हो गए और हथियार लेकर पैंथर को मारने जंगल में दौड़ पड़े। एक बार उनके बीच पैंथर का ग्रामीणों से आमना-सामने भी हुआ लेकिन पलभर में ही वह नजरों से ओझल हो गया। अभी मौके पर वनविभाग की टीम डेरा डाले हुए है, अधिकारियों ने पैंथर को आदमखोर घोषित करने के लिए
कमेटी का गठन कर रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी है एवं जयपुर से पैंथर एक्सपर्ट अनिल माथुर को बुलाया है।
ग्रामीणों ने बताया कि आइफाफला गांव में सोमवार शाम करीब 4.30 बजे श्यामलाल (15) पुत्र नारायणलाल मीणा खेत पर गाय एवं बकरियों के बीच बाड़े में था तभी वहां अचानक घात लगाकर बैठे पैंथर ने हमलाकर श्यामलाल को दबोचकर जंगल में भाग निकला। ग्रामीणों ने हो-हल्ला करते हुए सरपंच पति राजेन्द्र मीणा को जानकारी दी और बाद में पैंथर के जाने वाले मार्ग पर उसकी तलाश किया तो उन्हें करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर शव मिल गया। पैंथर ने श्यामलाल को दबोचते हुए उसकी गर्दन की हड्डी तोड़ दी। गौरतलब है कि 22 जुलाइ को भी बारा के भागलाघाट में पैंथर ने एक युवक को शिकार बनाया था।
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नहीं उठाने दिया शव
घटना की सूचना वनविभाग के कर्मचारियों को देने के बावजूद शाम 6 बजे तक मौके पर नहीं पहुंचने पर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। वे विभागीय अधिकारियों को मौके पर बुलाने की बात करते हुए रात को शव नहीं उठाया और मौके पर ही पंचायती करते रहे। पुलिस व वनविभाग के कर्मचारियों के पहरे के बीच रात को पैंथर ने जंगल में फिर से ग्रामीणों
के बीच धावा बोला और पुन: शव को उठा ले गया। पैंथर के अचानक इस हमले के दौरान ग्रामीणों ने उस समय इधर-उधर दौडकऱ जान बचाई। पैंथर के शव ले जाने तक गांव खौफ के साये में दुबके रहे। उसके बाद वन विभाग की टीम के साथ ग्रामीणों ने टॉर्च व व्हीसल बजाते हुए सर्च अभियान चलाया तो उन्हें करीब सौ मीटर की दूरी ही शव मिल गया। डर के साये में ग्रामीणों ने बमुश्किल शव उठाते हुए जंगल से बाहर निकले। रात करीब 2.30 बजे पुलिस ने शव को परसाद के सामुदायिक अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया।
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सुबह ग्रामीणों का जंगल में धावा
सुबह घटना का पता चलने पर आसपास के कई लोग वहां पहुंच गए। वे हाथों में हथियार लेकर पहाड़ पर पुलिस व वन विभाग की टीम के साथ सर्च अभियान चलाया। सुबह 7 से 11.30 बजे तक चले अभियान के दौरान एक बार पैंथर से सामना हुए लेकिन वह पलभर में ही नजरों से ओझल हो गया।
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ग्रामीणों के साथ चलती रही बैठक
घटना के बाद दोपहर को कांग्रेसी नेता विवेक कटारा, बारां सरपंच हरीश मीणा, सरू सरपंच नारायणलाल मीणा, सरूपाल सरपंच नरेश मीणा, डेलवास सरपंच हजारीलाल मीणा, पडूणा पूर्व सरपंच केसूलाल मीणा, खरबर सरपंच मुकेश मीणा, पूर्व सरपंच चुन्नीलाल मीणा, प्रताप मीणा एवं जाबला सरपंच अजित मीणा के साथ ही गिर्वा एसडीएम देशबन्धु, गिर्वा तहसीलदार श्रवणसिंह, सराड़ा थानाधिकारी रतनसिंह, जावरमाइंस थानाधिकारी भरत योगी, परसाद थानाधिकारी सुभाष परमार, वनविभाग से जिला वन अधिकारी अजय चित्तौड़ा, सहायक वन अधिकारी बंसल, पटवारी हरीश चौबीसा, राकेश मीणा के साथ चणावदा गमेती सहित करीब 500 से 700 ने ग्रामीणों वनविभाग के अधिकारियों के साथ पैंथर को आदमखोर घोषित कर शूट करने को लेकर वार्ता चलती रही।
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