Electric Bus Udaipur: बढ़ते ट्रैफिक, महंगे पेट्रोल-डीजल और प्रदूषण की समस्या के बीच शहरवासियों को जून से बड़ी राहत मिलने वाली है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत उदयपुर में 50 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होगा।
Udaipur Electric Bus: उदयपुर। झीलों की नगरी अब सार्वजनिक परिवहन के नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। बढ़ते ट्रैफिक, महंगे पेट्रोल-डीजल और प्रदूषण की समस्या के बीच शहरवासियों को जून से बड़ी राहत मिलने वाली है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत उदयपुर में 50 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होगा। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की टीम की ओर से धोल की पाटी स्थित निर्माणाधीन डिपो का निरीक्षण करने के बाद अब परियोजना को अंतिम गति मिल गई।
9 करोड़ रुपए से तैयार यह आधुनिक डिपो पूरी तरह तैयार हो चुका है। चार्जिंग स्टेशन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और तकनीकी कार्य भी पूरा हो गया। अभी सिर्फ कनेक्शन का काम चल रहा है। यह कार्य पूरा होते ही डिपो संबंधित फर्म से सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज को सुपुर्द किया जाएगा। इसके बाद बस सप्लाई कंपनी को डिपो हैंडओवर कर संचालन प्रक्रिया शुरू होगी।
नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में बड़ा विस्तार होगा। पहले चरण में 10 रूट पर बसें चलाई जाएंगी, जिनमें पांच नए मार्ग भी शामिल रहेंगे। बाद में यात्री भार और जरूरत के अनुसार इसे बढ़ाकर 15 रूट तक किया जाएगा। जहां यात्रियों की संख्या अधिक है, वहां इन बसों का संचालन प्राथमिकता से होगा। 45 बसें छोटी 9 मीटर की होंगी, जो अंदरूनी और संकरी सड़कों वाले क्षेत्रों में चलेंगी, जबकि 5 बड़ी 12.5 मीटर की बसें मुख्य और व्यस्त मार्गों पर संचालित की जाएंगी।
शहरवासियों को इसका सबसे बड़ा फायदा कम किराए और सुविधाजनक सफर के रूप में मिलेगा। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन की ओर आकर्षित होंगे। इससे दैनिक यात्रा का खर्च कम होगा और आमजन को राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहर में मजबूत और नियमित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित होती है तो लोग निजी वाहन कम निकालेंगे। इसका सीधा असर ट्रैफिक जाम और पार्किंग दबाव पर पड़ेगा। बढ़ते शहर में अभी सबसे बड़ी चुनौती यातायात और पार्किंग बन चुकी है। बाजारों और प्रमुख मार्गों पर रोजाना जाम की स्थिति बनती है।
नई ई-बसों के आने से बड़ी संख्या में लोग सिटी ट्रांसपोर्ट का उपयोग करेंगे, जिससे सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या कम हो सकती है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक बसें पर्यावरण के लिहाज से भी बड़ा कदम मानी जा रही हैं। डीजल बसों की तुलना में इनमें ध्वनि और वायु प्रदूषण बेहद कम होगा। पर्यटन नगरी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।
धोल की पाटी में विकसित ई-बस डिपो को पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से तैयार किया गया है। यहां बसों की पार्किंग, चार्जिंग, मरम्मत और संचालन नियंत्रण की समस्त व्यवस्थाएं एक ही परिसर में उपलब्ध है। डिपो का सिविल कार्य रूडसिको कंपनी की ओर से कराया गया, जबकि बिजली लाइन का कार्य एवीएनएल ने पूरा किया है। परियोजना लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 60 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार की ओर से वहन किया गया है।
धोल की पाटी स्थित डिपो का कार्य पूरा हो चुका है। जून से 50 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने की पूरी तैयारी है। पहले चरण में 10 मार्गों पर बसें चलाई जाएंगी और बाद में इसे बढ़ाया जाएगा, ताकि शहर के अधिकतम क्षेत्रों को सिटी ट्रांसपोर्ट से जोड़ा जा सके।
अभिषेक खन्ना, सिटी ट्रांसपोर्ट के अध्यक्ष एवं नगर निगम आयुक्त