
उदयपुर. गींगला . कुछ करने का जज्बा हो तो कुछ मुश्किल नहीं है। हालांकि शुरुआत में कुछ समस्या आती है लेकिन मेहनती व्यक्ति मंजिल को छू ही लेते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है उदयपुर जिले के गुड़ेल गांव के किसान उम्मेद सिंह राठौड़ ने।
इन्होंने करीब चार वर्ष पहले महाराष्ट्र में व्यवसाय करते वक्त खेती में नवाचार और फलदार पौधों लगाने की ऐसी तकनीक सीखी कि आज वे खुश नजर आ रहे हैं। किसान राठौड ने बताया कि बंजर जमीन को समतल कराने के बाद 1100 अनार के पौधे लगाए और उनकी अपने स्तर पर सार संभाल की। जिससे आज 1000 पौधे बड़े होकर फल से लद रहे हैं। किसान का कहना है कि प्रत्येक पौधे पर करीब 20 से 50 किलो तक के फल इस समय तैयार है, जो हफ्तेभर में उतारे जा सकेंगे। अब इन पौधों से हजारों रुपए की आमदनी होगी।
परम्परागत खेती से अलग हट कर किया नवाचार राठौड़ ने बताया कि पूर्व में परम्परागत गेहूं, जौ, मक्का, ज्वार खेतों में बोया करते थे। कई तरह की समस्या आने पर मेहनत के अनुरूप फल नहीं मिलता था। ऐसे में फलदार पौधों की यह सीख वास्तव में कारगर साबित हुई। इसमें मेहनत तो है लेकिन परम्परागत खेती से कई गुना अधिक दाम मिल सकेंगे। मेहनत से बंजर जमीन भी उपजाऊ हो गई और आय का स्थाई जरिया भी हो गया। उन्होंने बताया कि कृषि या उद्यान विभाग ने आशानुरूप राय व दवाई देने की जरूरत बताई। ड्रीम फंव्वारा सिंचाई योजना से पानी दिया जा रहा है।