उदयपुर

Udaipur Honey Trap Case: पुलिस के नाम से धमकाती, डॉक्टर को ब्लैकमेल करने वाली युवतियों ने कई लोगों को बनाया शिकार

Doctor Blackmail Case: डॉक्टर को ब्लैकमेल कर लाखों रुपए ऐंठने के आरोप में गिरफ्तार युवतियों से पूछताछ में सामने आया है कि यह केवल एक मामला नहीं था, बल्कि दोनों युवतियां लंबे समय से इसी तरह लोगों को निशाना बना रही थीं।

2 min read
Jun 12, 2026
Udaipur Honey Trap Case
उदयपुर हनी ट्रैप केस। Photo: AI-generated

उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर में हाल ही में सामने आए हनी ट्रैप केस की जांच में एक और नया खुलासा हुआ है। डॉक्टर को ब्लैकमेल कर लाखों रुपए ऐंठने के आरोप में गिरफ्तार दोनों युवतियों से रिमांड अवधि में की जा रही पूछताछ में सामने आया है कि यह केवल एक मामला नहीं था, बल्कि दोनों युवतियां लंबे समय से इसी तरह लोगों को निशाना बना रही थीं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कई अन्य लोग भी इनके जाल में फंसे, लेकिन बदनामी के डर से न तो पुलिस तक पहुंचे और न ही शिकायत दर्ज कराई।

बताया गया कि आरोपी युवतियां पहले लोगों से दोस्ती बढ़ाती थीं और विश्वास जीतने के बाद उनकी निजी जानकारी जुटाती थीं। इस दौरान वे पीड़ितों के मोबाइल फोन से परिवार, पत्नी और अन्य करीबी रिश्तेदारों के मोबाइल नंबर भी हासिल कर लेती थीं। बाद में इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल दबाव बनाने और ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता था। आरोपी 26 वर्षीय सुल्तानपुरी निठारी नई दिल्ली हाल हर्ष नगर मल्लातलाई निवासी कृष्णा देवी गौतम और 22 वर्षीय ट्रांसपोर्ट ऑथोर्टी हिमगिरी एन्कलेव बुरारी उत्तरी दिल्ली हाल संतनगर उत्तरी दिल्ली निवासी कशिश कुमारी भारद्वाज रिमांड पर है। 13 जून तक रिमांड पर है।

सामाजिक प्रतिष्ठा को बनाती थीं हथियार

जांच में सामने आया है कि युवतियां पीड़ितों को उनकी पत्नी, परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा का हवाला देकर धमकाती थीं। कई मामलों में निजी तस्वीरें, चैट और वीडियो सार्वजनिक करने की चेतावनी दी जाती थी। इसके बाद समझौते के नाम पर रकम मांगी जाती थी। पुलिस को आशंका है कि कई लोगों ने सामाजिक बदनामी से बचने के लिए बिना शिकायत किए ही रकम दे दी।

पुलिस से संबंध का जमाती थीं रौब

पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी खुद को पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का करीबी बताकर लोगों को डराती थीं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में आम व्यक्तियों के मोबाइल नंबर पुलिस अधिकारियों के नाम से सेव करके पीड़ितों को दिखाए जाते थे, ताकि उन्हें लगे कि आरोपी युवतियों की पुलिस तंत्र में गहरी पहुंच है। इस तरीके से वे लोगों पर दबाव बनाकर पैसे वसूलने का प्रयास करती थीं।

पुराने मामलों की खोज में जुटी पुलिस

जांच एजेंसियां अब युवतियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इससे ऐसे अन्य पीड़ितों और मामलों की जानकारी मिल सकती है, जो अब तक सामने नहीं आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ आगे बढ़ने के साथ इस गिरोह के कामकाज और संभावित सहयोगियों को लेकर भी अहम खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा क्या इसके तार किसी बड़े गिरोह से जुड़े हुए हैं।

Published on:
12 Jun 2026 03:18 pm