उदयपुर

उदयपुर : बदले समीकरणः अबकी बार 70 नहीं 80 वार्डों से बनेगी शहरी सरकार, 19 सितंबर तक मिलेगा नया महापौर

उदयपुर नगर निगम चुनाव इस बार 70 की जगह 80 वार्डों में होंगे, नए परिसीमन से राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। 19 सितंबर तक शहर को नया महापौर मिलने की संभावना है, जिससे सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।
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Jul 22, 2026
NAGAR NIGAM UDAIPUR
नगर निगम उदयपुर

उदयपुर. बिना निर्वाचित बोर्ड और महापौर के चल रहे उदयपुर नगर निगम को अब आठ माह बाद 19 सितंबर तक नई शहरी सरकार मिल जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से निकाय चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही शहर की राजनीति ने रफ्तार पकड़ ली है। 22 अगस्त को लोक सूचना जारी होने के साथ चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी और तय कार्यक्रम के अनुसार चुनाव हुए तो 19 सितंबर तक नया महापौर चुन लिया जाएगा। इसके अगले दिन उपमहापौर की नियुक्ति होगी।

इस बार चुनाव पुराने 70 नहीं, बल्कि 80 वार्डों में होगा। नगर निगम सीमा में 10 नए वार्ड जुड़ने से शहर का राजनीतिक और सामाजिक भूगोल पूरी तरह बदल गया है। 19 पंचायतों के 33 गांवों को शहरी सीमा में शामिल किए जाने से निगम का विस्तार शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों तक हो गया है। यही वजह है कि इस बार का चुनाव केवल पार्षद चुनने का चुनाव नहीं, बल्कि बदले हुए वार्ड नक्शे, नए मतदाता और नए सामाजिक समीकरणों के बीच होने वाला मुकाबला माना जा रहा है। नए परिसीमन में कई गलियां और मोहल्ले एक वार्ड से दूसरे वार्ड में चले गए हैं। कुछ नए क्षेत्रों को पुराने शहरी इलाकों के साथ जोड़ा गया है। ऐसे में राजनीतिक दलों और दावेदारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने समीकरण को नए वार्ड नक्शे के हिसाब से फिर से जमाने की होगी।

शहर की आबादी 5 लाख 57 हजार 677

नगर निगम सीमा में 35 गांवों को शामिल किए जाने के बाद शहर की कुल आबादी 5 लाख 57 हजार 677 हो गई है। इनमें 2 लाख 89 हजार 205 पुरुष और 2 लाख 68 हजार 472 महिलाएं हैं। पहले नगर निगम क्षेत्र की आबादी 4 लाख 51 हजार 100 थी। इसमें 2 लाख 33 हजार 959 पुरुष और 2 लाख 17 हजार 141 महिलाएं शामिल थे। नए क्षेत्रों के जुड़ने से निगम का क्षेत्र करीब 15 से 20 किलोमीटर तक विस्तारित हुआ है। नई सीमा में शामिल क्षेत्रों के साथ निगम का सामाजिक आधार भी बड़ा हुआ है। उपलब्ध जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार नए विस्तारित क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी 55 हजार 625 और अनुसूचित जनजाति की आबादी 48 हजार 262 है। इसके अलावा सामान्य वर्ग की आबादी भी बड़ी संख्या में है।

सबसे बड़ा वार्ड 1, सबसे छोटा वार्ड 22

80 वार्डों में आबादी का अंतर भी चुनावी गणित को प्रभावित करेगा। वार्ड नंबर 1 सबसे बड़ा वार्ड है, जहां 9190 की आबादी है। इसके बाद वार्ड 80 में 8874, जबकि वार्ड 32 में 8232 आबादी है। वहीं वार्ड 22 सबसे छोटा वार्ड है, जिसकी आबादी 6095 है। इसके बाद वार्ड 23 में 6207, वार्ड 39 में 6170 और वार्ड 28 में 6193 आबादी है। यानी सबसे बड़े और सबसे छोटे वार्ड की आबादी में 3095 का अंतर है। अधिकांश वार्डों की आबादी 6000 से 8000 के बीच है। ऐसे में चुनावी मुकाबले में कुछ हजार वोट भी जीत-हार का बड़ा अंतर तय कर सकते हैं

महापौर की कुर्सी पर किसका चेहरा

पिछले कार्यकाल में महापौर की कुर्सी पर ओबीसी पुरुष वर्ग से जी.एस. टांक बैठे थे। अब नए वार्ड परिसीमन और आगामी आरक्षण व्यवस्था के अनुसार महापौर पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, इस पर राजनीतिक दलों और दावेदारों की नजर है। आरक्षण की घोषणा के बाद ही महापौर पद के संभावित चेहरों को लेकर तस्वीर साफ होगी। हालांकि चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही दावेदारों ने वार्ड स्तर पर संपर्क बढ़ा दिया है।

एक नजर में

पहले वार्ड- 70

अब वार्ड- 80

नए वार्ड- 10

कुल आबादी- 557677

पुरुष- 289205

महिलाएं- 268472

शहरी सीमा में शामिल- 19 पंचायतों के 33 गांव

सबसे बड़ावार्ड: वार्ड 1 - 9190 आबादी

सबसे छोटा वार्ड: वार्ड 22- 6095 आबादी

Updated on:
22 Jul 2026 06:14 pm
Published on:
22 Jul 2026 06:14 pm