
धीरेंद्र् जोशी/उदयपुर . शहर के निकट अरावली की वादियों में वन विभाग की ओर से चिरवा घाटा में विकसित की जा रही फूलों की घाटी में स्थापित जिप लाइन पर सवारी अब प्रशिक्षित हाथों में है जिससे रोमांच भरी अनुभव के दौरान सैलानियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। उपवन संरक्षक उत्तर ओपी शर्मा ने बताया कि चिरवा घाटे में फूलों की घाटी और जैव विविधता पार्क में लगाई गई जिप लाइन पर सभी कर्मचारी प्रशिक्षित है। प्रशिक्षण मान्यता प्राप्त संस्था से दिलवाया गया है। साथ ही सभी कर्मचारियों को सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। प्रशिक्षण में जिप लाइन को ऑपरेट करना, आपात काल में बचाव आदि के गुर दिए गए।
31 कर्मचारियों ने लिया प्रशिक्षण
वन रक्षक पंकज खटीक ने बताया कि वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति, अंबेरी के 26 सदस्यों और वन विभाग के 5 कर्मचारियों को मिलाकर 31 लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह प्रशिक्षण माउंट आबू में तीन चरणों में हुआ। प्रत्येक कर्मचारी ने सात दिन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
यह लिया प्रशिक्षण
कर्मचारी राजेश्वरी राठौड़ ने बताया कि प्रशिक्षण में क्लाइम्बिंग रेस्क्यू, लाइन पर अटके हुए लोगों को पुन: सुरक्षित छोर तक लाना, हार्नेस पहनाना, एक से दूसरे छोर पर भेजने से पूर्व झंडे और वायरलेस से सामंजस्य बिठाना आदि का प्रशिक्षण दिया गया।
5 माह में 21 लाख की आय
उप वन संरक्षक शर्मा ने बताया कि फूलों की घाटी उद्यान 2 अगस्त को शुरू हुआ था। पांच माह में इस उद्यान से 21 लाख रुपए की आय हुई है जिससे घाटी में विकास कार्य किए जा रहे हैं। सरकार ने एक बार इस उद्यान के लिए 1.60 लाख रुपए लगाए है। अब जो भी विकास होगा, उद्यान से होने वाली आय से होगा। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के प्रशिक्षण में करीब डेढ़ लाख रुपए का खर्च आया। यह राशि भी उद्यान से अर्जित आय से ही खर्च की गई है। उन्होंने बताया कि मेवाड़ जैव विविधता पार्क की शुरुआत फरवरी-2016 में हुई थी। तब से लेकर अब तक इस पार्क में 42 लाख की आय हुई है। पार्क में लगे मनोरंजन और रोमांच के संसाधनों की सार संभाल भी इसी आय से की जा रही है।