
उदयपुर. वर्तमान में महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं है। घर से निकलने से लेकर घर पहुंचने तक महिलाओं के मन में असुरक्षा का भाव रहता है। यह भाव महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराधों के कारण पैदा हुए हैं। इन पर सख्ती से लगाम लगाने की आवश्यकता है। यह बात गुरुनानक कॉलेज के छात्राओं ने राजस्थान पत्रिका के स्पीक अप कार्यक्रम में कही।
मुस्कान वैष्णव ने बताया कि हिला सुरक्षा का मुद्दा अत्यंत ही गंभीर है। वर्तमान में महिला अपराधों में एकाएक बढ़ोतरी हुई है जो चिंता का विषय है। महिलाओं को अपने साहस और संबल के माध्यम से ऐसी परिस्थितियों का सामना करने का हौसला पैदा करना होगा तभी अपराधी तत्वों से निपटा जा सकेगा। महिला शिक्षा भी महिला अपराधों के कारण बाधित हो रही है इस पर सरकार से लेकर समाज को गंभीरता से चिंतन करना चाहिए।
रामी भट्ट ने कहा कि विद्यालय स्तर से लेकर महाविद्यालय स्तर तक महिला सुरक्षा के संदर्भ में व्यापक चिंतन होना जरूरी है। महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराधों के कारण कई बार लड़कियों को उनके माता-पिता उन्हें नियमित विद्यार्थी बनाने की बजाय प्राइवेट में परीक्षा दिलाना उचित समझ रहे हैं, लेकिन हर हाल में इसका समाधान होना चाहिए ताकि लड़कियां निडर होकर अपनी शिक्षा के माध्यम से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके।
आर्ची शाह ने बताया कि महिलाओं में सामाजिक तत्वों से निपटाने का साहस उत्पन्न करना होगा। परिवार से लेकर सार्वजनिक जीवन में महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को बल देकर व्यापक स्तर पर इसके निराकरण का प्रयास करना होगा। तभी महिला अपराधों में कमी हो सकेगी। समाज को भी जागरुक होकर इस दिशा में सोचना होगा।
कनिष्क साहू ने बताया कि महिला सुरक्षा का मुद्दा बहुत ही गंभीर और विचारणीय है। महिलाएं केवल सरकार और पुलिस के भरोसे ही अपनी सुरक्षा का जिम्मा नहीं छोड़ सकती। समाज में ऐसे तत्वों को सबक सिखाने के लिए तत्पर रहना होगा जो महिला अपराधों को बढ़ावा देते हैं और महिलाओं को कमतर समझकर उनके साथ दुर्व्यवहार की कोशिश करते हैं। परिवार में इस प्रकार की चर्चा करके लड़कियों को संबल और साहस प्रदान करना होगा ताकि महिलाएं समाज में स्वाभिमान और सम्मान के साथ जी सके।
सुजेन फ्रांसिस ने बताया कि महिला के जीवन में असुरक्षा की भावना सदैव बनी रहती है। मीडिया तथा समाज के माध्यम से महिलाओं में सुरक्षा का भाव उत्पन्न करना होगा। कानून और व्यवस्था की दृष्टि से महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी तभी महिला अपराधों में कमी हो सकेगी इसके अलावा विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर लड़कियों में आत्मविश्वास तथा सुरक्षा की शिक्षा देकर उन्हें मजबूत बनाना होगा तभी सामाजिक तत्वों से अपनी सुरक्षा कर सकेंगी।