उदयपुर

उदयपुर : सड़क से स्पेन तक…शहर के दो स्ट्रीट डॉग को मिला नया घर

उदयपुर की संस्था ने दो स्ट्रीट डॉग लीली और भोलू को बचाकर एक साल इलाज के बाद स्पेन में नया घर दिलाया। सोशल मीडिया और सख्त प्रक्रिया के जरिए संस्था अब तक सैकड़ों पशुओं को गोद दिला चुकी है।
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Jul 26, 2026
neeli or bholu
लीली व भोलू

उदयपुर. एक तरफ शहर में स्ट्रीट डॉग के काटने की घटनाओं के बाद उन्हें पकड़कर शेल्टर करने के आदेश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उदयपुर की एक संस्था ऐसे बेसहारा, घायल और बीमार पशु-पक्षियों को नया जीवन दे रही है। सपोर्ट स्ट्रेस उदयपुर संस्था ने सड़क पर लावारिस मिले दो स्ट्रीट डॉग को न केवल बचाया, बल्कि करीब एक साल इलाज और देखभाल के बाद अब स्पेन के बार्सिलोना में नया घर दिलाया। शनिवार को स्पेन के दो डॉग लवर दोस्त थोमस और एलिक्स उदयपुर पहुंचे और लीली व भोलू को गोद लेकर अपने साथ स्पेन ले गए। एक साल तक संस्था में रहने के बाद जब दोनों विदा हुए तो संस्था से जुड़े लोगों की आंखें भर आईं।

हाईवे पर मिली थी दोनों, एक का पैर टूटा था

लीली करीब एक साल पहले एकलिंगजी हाईवे पर बीमार और भोलू पिंडवाड़ा हाईवे पर अकेली मिली। उस समय दोनों करीब दो माह की थी और गंभीर बीमार थीं। एक का पैर टूटा था वहीं दूसरी डॉग पार्वो वायरस से संक्रमित थी। दोनों को इलाज के लिए संस्था लाया गया। जहां से वे मिली थी, वहां उनकी मां नहीं थी और उन्हें वापस सड़क पर छोड़ना भी संभव नहीं था। ऐसे में संस्था ने दोनों की जिम्मेदारी ली। एक साल तक संस्था की संचालिका चांदनी सोनी और स्टाफ ने उनका इलाज और देखभाल किया। इस दौरान दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई।

विदेशी दोस्तों को पसंद आई दोनों की दोस्ती

एक साल पहले स्पेन के बार्सिलोना से आए डॉग लवर दोस्तों को दोनों डॉग पसंद आ गए। दोनों की आपस में गहरी दोस्ती देखकर उन्होंने फैसला किया कि दोनों को एक साथ ही गोद लिया जाएगा। इसके बाद एक साल तक गोद देने की प्रक्रिया चली। दोनों को विदेश ले जाने के लिए जरूरी टीकाकरण कराया। करीब दो माह पहले वैक्सीनेशन के बाद उनका सीरम टेस्ट कराया गया और रिपोर्ट यूके भेजी गई। एंटीबॉडी और रेबीज से संबंधित जांचों के बाद दोनों को विदेश ले जाने की अनुमति मिली। पूरी प्रक्रिया में करीब 5 लाख रुपए खर्च हुए। शनिवार को दोनों विदेशी दोस्त उदयपुर पहुंचे और लीली व भोलू को अपने साथ ले गए। दोनों पहले ट्रैवलर से दिल्ली ले गए। इसके बाद दिल्ली से जर्मनी और फिर जर्मनी से स्पेन के बार्सिलोना पहुंचेंगे। दोनों डॉग लवर ने संस्था को भी आर्थिक सहयोग दिया।

सोशल मीडिया से तलाशते हैं नया घर

संस्था सोशल मीडिया से पशुओं को गोद देने की जानकारी साझा करती है। गोद लेने वाले व्यक्ति से फॉर्म भरवाने के साथ ही जरूरी दस्तावेज लेते हैं। इसके बाद उनके घर की जांच की जाती है कि वहां पशु के रहने के लिए उचित व्यवस्था है या नहीं। संतुष्ट होने के बाद ही गोद देने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। अब तक संस्था के माध्यम से 200 पशु-पक्षियों को गोद दिया जा चुका है। लीली और भोलू पहली बार ऐसे स्ट्रीट डॉग हैं, जिन्हें संस्था ने विदेश में गोद दिया है।

चार साल में 700 पशु-पक्षियों की सेवा

संचालिका चांदनी ने बताया कि संस्था ने चार साल से बेसहारा पशु-पक्षियों की सेवा कर रही है। संस्था से 20 लोग जुड़े हैं। वर्तमान में यहां 97 कुत्ते, 11 बिल्लियां, एक गाय, एक खरगोश और अन्य पक्षी हैं। इनमें ज्यादातर स्ट्रीट डॉग हैं। कुछ ऐसे हैं जिन्हें लोग काटने या परेशान करने से सड़क पर छोड़ देते हैं, जबकि कई घायल, बीमार या छोटे बच्चे हैं जिन्हें मां के न रहने पर संस्था ने पाला है। संस्था अब तक 700 पशु-पक्षियों की सेवा कर चुकी है और इनमें से 250 को गोद दिया जा चुका है। उदयपुर के अलावा जयपुर सहित अन्य शहरों से भी पशु संस्था तक पहुंचते हैं।

Updated on:
26 Jul 2026 06:04 pm
Published on:
26 Jul 2026 06:04 pm