
उदयपुर। करीब सवा महीने पहले पंचवटी स्थित ज्वैलरी शोरूम में एक करोड़ की चोरी करने वाली अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश हो गया है। पुलिस ने जहां पहले 2 बदमाशों को दबोचा था, वहीं अब सरगना सहित तीन को गिरफ्तार किया है। आरोपी उत्तरप्रदेश के पिनाहट और शमशाबाद में चम्बल के बीहड़ों की शातिर अन्तरराज्यीय गैंग से जुड़े हैं। उन्होंने चोरी का माल बीहड़ों में गड्ढे खोदकर दबा दिया था, जिसे पुलिस ने बरामद किया है।
एसपी डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि सरगना पुरा नत्था झोरिया पिनाहट आगरा निवासी आनन्द उर्फ कुकडीया वर्मा, धनपाल उर्फ धान्धु वर्मा और नगला मुक्ता थाना शमशाबाद आगरा निवासी गुड्डू राठौड़ को गिरफ्तार किया गया। धनपाल के विरुद्ध 3, आनन्द के विरुद्ध 2 केस दर्ज हैं। गिरोह का पता लगाने के लिए एएसपी सिटी उमेश ओझा, नगर पश्चिम वृताधिकारी राजेश यादव के सुपरविजन और थानाधिकारी राजूदेवी राज के नेतृत्व में कई टीमें जुटी थीं।
गत 29 जुलाई को पंचवटी स्थित नवीन ज्वैलर्स शोरूम में एक करोड़ की चोरी हुई थी। प्रोपराइटर नवीन स्वरूपरिया ने हाथीपोल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि चोर दुकान का साइड का शटर उखाड़कर और कांच का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे थे। करीब 22 लाख के हीरे, 390 ग्राम सोने के जेवर, 12 किलो चांदी के जेवर व बर्तन और 9.75 लाख नकद यानी 1 करोड़ का माल ले गए।
पुलिस टीमों ने उदयपुर शहर के कई सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, जिसमें पांच संदिग्ध वारदात से पहले दुकान की रैकी करते नजर आए थे। रूट ट्रैक करने पर सिटी रेलवे स्टेशन से चित्तौड़गढ़ की तरफ जाना सामने आया। पुलिस ने चित्तौड़गढ़, कोटा, बारां, धौलपुर और ग्वालियर से लेकर आगरा तक 200 कैमरों की कड़ियां जोड़ी तो चंबल बीहड़ तक जा पहुंचे।
पुलिस ने बीहड़ों में सूचना जुटाकर आरोपियों के ठिकानों पर घेराबंदी कर दबिश दी। उनकी निशानदेही पर बीहड़ के बीच खेतों में गड्ढे खोदकर छिपाया गया 60 लाख का चोरी का माल बरामद किया। अब तीनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। गैंग के अन्य फरार सदस्य मनोज उर्फ डॉक्टर वर्मा की तलाश और शेष माल की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं।
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गैंग के दो सदस्य मनोज वर्मा और आनंद वर्मा वारदात से 2 माह पहले मजदूरी करने उदयपुर आए थे। उन्होंने ज्वैलरी शोरूम की रैकी की और गैंग को बुलाया। पास के नाले से सेंधमारी की। आरोपियों ने वारदात के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया। भागते हुए लगातार ट्रेन व बसें बदलते रहे और हर बार नकद भुगतान किया ताकि डिजिटल या फिजिकल साक्ष्य नहीं छूटे।