
उदयपुर. कभी सुबह की सैर, खेत-खलिहान और खुले वातावरण में दिन बिताने वाली जीवनशैली अब घर, ऑफिस, मॉल और मोबाइल स्क्रीन तक सिमट गई है। इसका असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। सूरज की रोशनी वाले उदयपुर में भी विटामिन-डी की कमी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली से जुड़ी नई "साइलेंट बीमारी" मान रहे हैं। संभाग में आरएनटी मेडिकल कॉलेज और जिला स्वास्थ्य केन्द्रों के 2024/25 डेटा में 50 वर्ष से अधिक आयु के 74 प्रतिशत लोगों में विटामिन-डी की कमी पाई गई। केवल 26 प्रतिशत लोगों का स्तर सामान्य मिला। वहीं शहरी क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है, जहां 80 से 85 प्रतिशत लोगों में विटामिन-डी का स्तर सामान्य से कम पाया गया।
धूप नहीं, धूप से दूरी बन रही वजह
एमबी हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ओपी मीणा ने बताया कि समस्या धूप की उपलब्धता नहीं, बल्कि लोगों का धूप से दूर होना है। अब केवल बुजुर्ग ही नहीं 25 से 40 वर्ष के लोग भी विटामिन-डी की कमी से प्रभावित हो रहे हैं। लंबे समय तक एसी और इंडोर लाइफस्टाइल इसके प्रमुख कारण हैं। हड्डियों में दर्द, लगातार थकान, कमजोरी और मांसपेशियों की परेशानी वाले मरीजों में विटामिन-डी की कमी आम होती जा रही है।
महिलाओं और युवाओं में बढ़ रही चिंता
गर्भवती महिलाओं पर हुए अध्ययन में 65 प्रतिशत महिलाओं का विटामिन-डी स्तर सामान्य से कम पाया गया। चिकित्सकों का मानना है कि यही स्थिति शहरी युवाओं और कामकाजी महिलाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक घर और कार्यालय में रहने के कारण शरीर को पर्याप्त सूर्य प्रकाश नहीं मिल पा रहा।
10 में से 4 या 6 टेस्ट में कमी के संकेत
शहर के एमबी हॉस्पिटल के पैथोलॉजी टेस्ट में सामने आ रहा है विटामिन-डी की कमी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार हालात यह हैं कि हर 10 में से 4 से 6 टेस्ट में विटामिन-डी की कमी या अपर्याप्त स्तर पाया जा रहा है, जो एक गंभीर स्वास्थ्य संकेत माना जा रहा है।
ये कारण आए सामने
सुबह की धूप में कम समय बिताना
मोबाइल और लैपटॉप पर बढ़ता समय
शारीरिक गतिविधियों में कमी
बाहर निकलने की घटती आदत और खानपान में बदलाव
शरीर पर पड़ रहा असर
विटामिन-डी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से हड्डियों में दर्द, बार-बार थकान, मांसपेशियों की कमजोरी, जोड़ों की परेशानी और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक कमी बने रहने पर इसका असर जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ता है।
खास-खास
हर 10 में से 6 गर्भवती महिलाएं विटामिन-डी कमी से प्रभावित
बुजुर्ग वर्ग में 74% तक कमी दर्ज
ग्रामीण क्षेत्रों में भी 69% लोग प्रभावित
बचाव के लिए के ये करें
- रोजाना सुबह 20–30 मिनट धूप में बैठें या टहलें
- दोपहर से पहले की हल्की धूप को अधिक लाभदायक मानें
- एसी/बंद कमरे में लगातार बैठने से बचें
- रोजाना थोड़ी शारीरिक गतिविधि या योग करें
- मोबाइल, लैपटॉप का लगातार उपयोग कम करें
- हफ्ते में कम से कम 4–5 दिन आउटडोर एक्टिविटी रखें
- दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली जैसे आहार शामिल करें
- डॉक्टर की सलाह से ही विटामिन-डी सप्लीमेंट लें