उदयपुर

उदयपुर : सर्दी के बाद सप्लाई पर संकट के संकेत… पानी के लिए खर्च करने होंगे 55 करोड़

मानसून की कमी के बाद झीलों और बांधों का जलस्तर घटने से सर्दी के बाद जल संकट की आशंका बढ़ गई है। जलदाय विभाग ने मानसून तक व्यवस्था संभालने के लिए 55 करोड़ रुपए के प्रस्ताव जयपुर भेजे हैं। मानपुर-खरबड़िया में नलकूप, झील-फतहसागर पाइपलाइन की मरम्मत और जयसमंद लाइन पर काम होगा। 72 घंटे में जलापूर्ति से शहरवासी असंतुष्ट हैं। बढ़ते तापमान से वाष्पीकरण चिंता बढ़ा रहा है। विभाग को मावठ से झीलों में पानी आने की उम्मीद है।
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Oct 04, 2026
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उदयपुर. बरसात के अभाव में खाली पड़े बांध और उतरते झीलों के स्तर को लेकर जलदाय विभाग ही नहीं, शहरवासी भी चिंतित हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सर्दी बीतते ही जल संकट उत्पन्न होने की आशंका सता रही है। अगले मानसून तक जैसे-तैसे स्थिति काबू में रखने, पानी की भरपाई करने के लिए जलदाय विभाग ने प्लान बनाया है। नए प्रस्तावों में नलकूप खुदेंगे, वहीं पाइपलाइनों की मरम्मत होगी। इस बंदोबस्त में पूरे 55 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। विभाग ने प्रस्ताव जयपुर मुख्यालय भेजे हैं, जिन पर स्वीकृति मिलते ही काम शुरू होंगे।

नए कामों के तहत मानपुर और खरबड़िया के आसपास के क्षेत्र में नलकूप खोदे जाएंगे। जिनका पानी हिरणमगरी व आसपास के उपनगरीय क्षेत्र में लाया जाएगा। दूसरी ओर बड़ी झील से फतहसागर फिल्टर प्लांट तक बिछी पाइपलाइन का कई साल से इस्तेमाल नहीं हुआ है। ऐसे में पाइपलाइन को फिर से शुरू किया जाएगा, जिसकी मरम्मत में बड़ा बजट खर्च होगा। इसके अलावा जयसमंद की पाइपलाइन की मरम्मत में करीब दस करोड़ रुपए खर्च होंगे। साथ ही शहर के और भी प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन डाली जाएगी।

जनता संतुष्ट नहीं, पानी बह रहा

जलदाय विभाग की ओर से 24 सितम्बर को जलापूर्ति व्यवस्था में बदलाव कर 48 घंटे से 72 घंटे किया। इसको लेकर फिलहाल शहरवासी संतुष्ट नहीं हैं। बताते हैं कि तीसरे दिन हो रही जलापूर्ति से जहां लोग घरों में स्टॉक ज्यादा कर रहे हैं, वहीं इसके बाद भी पानी व्यर्थ बह रहा है। अलग-अलग संगठन जलापूर्ति 48 घंटे में ही करने की मांग कर चुके हैं। वहीं, विधायक ताराचंद जैन भी जलापूर्ति पूर्ववत करने के लिए कह चुके हैं।

चिंता: बढ़े तापमान से वाष्पीकरण ज्यादा

विभाग ने फिलहाल नई व्यवस्था के अनुसार ही जलापूर्ति को सही माना है। लेकिन, चिंता यह भी है कि इन दिनों तापमान उच्च स्तर पर है। अमूमन अक्टूबर की शुरुआत में तापमान 30 से 32 डिग्री तक रहता है, वह 35 डिग्री से अधिक बना हुआ है। ऐसे में झीलों में कम पानी के भी वाष्पीकरण का नुकसान बढ़ गया है। अगले दो-तीन सप्ताह तक इसी तरह पारा चढ़ा रहा तो आगे आने वाला संकट और जल्दी आ सकता है।मानसून की कमी के बाद झीलों और बांधों का जलस्तर घटने से सर्दी के बाद जल संकट की आशंका बढ़ गई है। जलदाय विभाग ने मानसून तक व्यवस्था संभालने के लिए 55 करोड़ रुपए के प्रस्ताव जयपुर भेजे हैं। मानपुर-खरबड़िया में नलकूप, झील-फतहसागर पाइपलाइन की मरम्मत और जयसमंद लाइन पर काम होगा। 72 घंटे में जलापूर्ति से शहरवासी असंतुष्ट हैं। बढ़ते तापमान से वाष्पीकरण चिंता बढ़ा रहा है। विभाग को मावठ से झीलों में पानी आने की उम्मीद है।

छोटी उम्मीद मावठ की बरसात से भी

इस बार मानसून ने निराश किया, लेकिन छोटी उम्मीद मावठ (सर्दी के दिनों में होने वाली बरसात) से भी बनी हुई है। करीब चार साल पहले चक्रवात के कारण मावठ में भी झीले लबालब होकर छलकने जैसी स्थिति बन चुकी है। ऐसे में उम्मीद है कि इस बार भी ऐसा कुछ हो कि मावठ से झीलों में पानी की आवक हो जाए, जो शहर के लिए मुर्दे में जान फूंकने जैसा होगा। ऐसा होने पर कुछ राहत संभव है।

Updated on:
04 Oct 2026 07:36 pm
Published on:
04 Oct 2026 07:36 pm