अग्नि को साक्षी मान जिसके साथ जीने और मरने की कसमें खाई, वह दुनिया से रुखसत हुई तो खुद भी जी न सका। यह वाकया उदयपुर में करीब 12 दिन पहले हुआ, जब दो दिन के अंतराल में पत्नी के बाद पति की भी मृत्यु हो गई। घटना शहर से सटे बेदला खुर्द गांव के प्रजापत परिवार की है।
अग्नि को साक्षी मान जिसके साथ जीने और मरने की कसमें खाई, वह दुनिया से रुखसत हुई तो खुद भी जी न सका। यह वाकया उदयपुर में करीब 12 दिन पहले हुआ, जब दो दिन के अंतराल में पत्नी के बाद पति की भी मृत्यु हो गई। घटना शहर से सटे बेदला खुर्द गांव के प्रजापत परिवार की है। यहां सुखदेवी माता रोड निवासी भोलीराम प्रजापत की पत्नी अंबाबाई (58) का गत 8 जून को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
पत्नी से बेहद प्रेम रखने वाले भोलीराम (62) इस सदमे को सह नहीं पाए और एक दिन बाद हृदयघात से उनकी भी मृत्यु हो गई। अंबाबाई लंबे समय से अस्वस्थ थीं। छत से गिरने के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। उसके बाद शरीर लकवाग्रस्त हो गया और बिस्तर में ही रही। पति ने करीब आठ साल तक बीमार पत्नी की खूब सेवा की।
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सुविवि में चतुर्थ श्रेणी से रिटायर्ड हुए थे भोलीराम
बडगांव उपप्रधान प्रताप सिंह राठौड़ ने बताया कि भोलीराम प्रजापत सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर थे। जो वर्ष 2017 में रिटायर्ड हुए। भोलीराम और अंबा बाई के एक बेटा और दो बेटियां हैं। परिजनों का कहना है कि जब से मां बिस्तर पर रही। पिता जी ने उन्हें एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ा। उनकी घर हो या बाहर खूब सेवा की।