
डॉ सुशील सिंह चौहान /उदयपुर. सार्वजनिक निर्माण विभाग के गोगुंदा उपखण्ड क्षेत्र में ग्रामीण सडक़ों पर ‘बेईमानी’ का काला डामर हो रखा है। विभागीय अभियंताओं की अनदेखी भांपकर ठेकेदार निर्माण के नाम पर सडक़ों पर केवल काली चादर चढ़ा रहे हैं। इस क्रम में पाटिया-मोरवेल से नीमच माता का खेड़ा मिसिंग लिंक सडक़ का मामला भी अब तूल पकड़ रहा है। यह सडक़ निर्माण के बाद बरसात की भी नहीं झेल पाई। पहाड़ी क्षेत्र की इस सडक़ के किनारे बरसाती पानी से कट गए, वहीं डामर की ऊपरी परत धूलने से कई जगह बारीक कंक्रीट उखड़ गई है। सडक़ के कटे किनारे के कारण दुपहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
उक्त सडक़ का लोकार्पण 15 जून 2017 को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के राज्यमंत्री धनसिंह रावत ने सांसद अर्जुनलाल मीणा एवं विधायक प्रतापलाल गमेती की उपस्थिति में किया था। ग्राम पंचायत क्षेत्र से होकर गुजर रही करीब चार किलोमीटर लंबी मिङ्क्षसग लिंक रोड पर निर्माण की लागत का सूचना पट्ट नहीं लगाया गया है। आनन-फानन में सडक़ के उद्घाटन के बाद उद्घाटन पट्टिका यहां जमीन और कच्ची दीवार के सहारे खड़ी हुई है। कोने पर लगी यह पट्टिका कर्व पर मुड़ते वाहनों के लिए भी दुविधाजनक बनी हुई है।
खामियों की कहानी
एक मोड़ से शुरू होने वाली इस सडक़ पर पहाड़ी हिस्सों से पानी की निकासी के लिए बनाया कंक्रीट पुलिया अव्यवस्थित है। कुछ आगे जाकर तालाब के किनारे जी-शिड्युल के मुताबिक चुनाई दीवार नहीं बनाई गई। इससे अकस्मात आने वाला वाहन सवार कभी भी अनजाने में सीधे तालाब में गिर सकता है। कुछ आगे जाकर ऊंचाई वाले हिस्से में सडक़ के नीचे गोल पाइप डाला गया है, लेकिन अनदेखी के चलते यह पाइप ऐसी जगह लगाया गया है, जहां पानी की आवक ही नहीं है। उल्टा एक छोर पर पानी निकासी वाला पाइप पहाड़ी से ढका है तो दूसरी ओर पाइप में कंक्रीट भरी हुई है। ग्राम पंचायत की ओर से बीच में बनाई गई सीमेंटेड सडक़ भी बेईमानी भरी है। पूरे रास्ते में जगह के हिसाब से सडक़ बनाई गई है। संकड़े रास्तों पर सडक़ की चौड़ाई का कोई मानदण्ड नहीं है।
जुटाते हैं जानकारी
सहायक अभियंता को क्षेत्र की सडक़ों की खस्ता हालत में सुधार को लेकर पाबंद किया हुआ है। निर्माण का नोटिस बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया और चुनाई वाले इलाकों में लापरवाही क्यों रही। इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई करेंगे।
चंद्रमोहन राज माथुर, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी