
नौनिहालों के कंधों पर निजी स्कूलों में पहली कक्षा से ही स्कूल बैग का ऐसा बोझ डाल दिया जाता है कि वह 12वीं कक्षा तक भी उससे निजात नहीं पा सकता। पहली से दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे भी 3 से 4 किलो का बोझ रोज उठा रहे हैं, वहीं इससे बड़ी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे तो 7 से 10 किलो तक का बोझ उठा रहे हैं। इन बैग्ज में विद्यार्थियों की 7 से 8 विषयों की लगभग 2 से 3 किताबें रहती हैं। वहीं, हर विषय की 1-1 नोटबुक्स भी शामिल हैं। ऐसे में इन सब किताबों का बोझ इतना हो जाता है कि बच्चा इससे ही परेशान हो जाता है।
सरकारी स्कूलों में नो बैग डे से विद्यार्थी हैं खुशव
हीं, सरकारी स्कूलों की बात की जाए तो राजस्थान सरकार ने सप्ताह में एक दिन बच्चों को बैग के बोझ से निजात दिलाने के लिए नो स्कूल बैग की शुरुआत वर्ष 2022 से की है, जिससे विद्यार्थी खुश है। इसके तहत बच्चे हर शनिवार को बैग नहीं ले जाते हैं, उन्हें स्कूल में ही कई तरह की अलग-अलग गतिविधियां कराई जाती हैं। इससे उनका बौदि्धक, शारीरिक विकास होता है। साथ ही सह शैक्षणिक गतिविधियों के प्रति भी विद्यार्थियों की रुचि बढ़ती है। वैसे, सीबीएसई व केंद्रीय विद्यालयों ने भी स्कूली बैग के बोझ को कम करने के लिए नियम बना रखे हैं, इन नियमों का कुछ ही निजी स्कूल पालन करते हैं।
जानिए क्या कहते हैं नियम ...
इधर, नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल बैग वेट पॉलिसी भी तैयार की गई है। इसके तहत स्कूल बैग का वजन पहली से दसवीं कक्षा के छात्रों के शरीर के वजन का 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।प्री प्राइमरी और प्राइमरी क्लास : नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी के अनुसार 10 से 16 किलोग्राम वजन वाले जो बच्चे प्री प्राइमरी क्लासेस में पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अपने साथ स्कूल बैग ले जाने की जरूरत नहीं है।
पहली से दूसरी कक्षा : स्कूल बैग का वजन 1.6 से 2.2 किलो
तीसरी से 5वीं कक्षा : स्कूल बैग का वजन 1.7 से 2.5 किलो
6वीं से 7वीं कक्षा : स्कूल बैग का वजन 2 से 3 किलो8वीं कक्षा : 2.5 से 4 किलो
9वीं से 10वीं कक्षा : 2.5 किलो से 4.5 किलो
11वीं से 12वीं कक्षा : स्कूल बैग का वजन 3.5 से 5 किलो तक हो सकता है।