उदयपुर

उदयपुर : ये दाग अब डराते नहीं… आधुनिक उपचार से 70 फीसदी तक रिकवरी, विटिलिगो पर टूट रहीं धारणाएं

विश्व विटिलिगो दिवस पर विशेषज्ञों ने कहा कि सफेद दाग छूत की बीमारी नहीं बल्कि ऑटोइम्यून त्वचा रोग है और समय पर आधुनिक उपचार से 60-70 प्रतिशत तक मरीजों में बेहतर सुधार संभव है।
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Jun 25, 2026
World Vitiligo Day 2026
file photo

उदयपुर.विटिलिगो यानी सफेद दाग। एक दौर था जब इस बीमारी का नाम सुनते ही मरीज की जमीन खिसक जाती थी। शरीर पर सफेद दाग इतने डराते थे कि लोग घरों से निकलना बंद कर देते थे। लेकिन अब इस बीमारी को लेकर सोच बदल रही है। कभी झिझक और गलत धारणाओं से घिरी यह बीमारी, आज आधुनिक इलाज और समय पर उपचार की बदौलत मरीजों को नई उम्मीद दे रही है। विश्व विटिलिगो दिवस पर विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में उपचार शुरू होने पर 60-70 प्रतिशत मामलों में बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं। अब एनबी-यूवीबी फोटोथैरेपी, एक्साइमर लेजर, इम्यूनोमॉड्यूलेटरी दवाइयां, स्किन ग्राफ्टिंग और मेलानोसाइट ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

यह छूत की बीमारी नहीं

त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय गुप्ता के अनुसार विटिलिगो का शारीरिक प्रभाव सीमित होता है, लेकिन सामाजिक और मानसिक प्रभाव कई बार अधिक गंभीर हो जाता है। आज भी कई लोग इसे छूत की बीमारी, खानपान की गलती या किसी अभिशाप से जोड़ देते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यह पूरी तरह गलत धारणा है। विटिलिगो एक ऑटोइम्यून स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली त्वचा को रंग देने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करती है। चेहरे, हाथों या शरीर के खुले हिस्सों पर सफेद धब्बे दिखाई देने पर विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं में आत्मविश्वास की कमी देखी जाती है। कई मरीज सामाजिक कार्यक्रमों से दूरी बनाने लगते हैं।

बदल रही समाज की सोच

सोशल मीडिया, जागरूकता अभियानों और सार्वजनिक मंचों पर विटिलिगो से जुड़े लोगों की सकारात्मक कहानियों ने समाज की सोच बदलने में योगदान दिया है। अब कई लोग खुलकर अपनी स्थिति स्वीकार कर रहे हैं और दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं।

इन्होंने सोच से लड़ाई जीत

शुरुआत में चेहरे पर सफेद दाग दिखने से झिझक महसूस होती थी। लोगों के सवाल परेशान करते थे, लेकिन डॉक्टर की सलाह और नियमित उपचार से काफी सुधार हुआ। अब मैं पहले की तरह सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा ले रही हूं।

काव्या, कॉलेज छात्रा

विटिलिगो होने के बाद लगा था कि जिंदगी बदल जाएगी, लेकिन सही इलाज और परिवार के सहयोग ने हौसला दिया। आज मैं सामान्य जीवन जी रहा हूं।

मनोज, निजी कर्मचारी

विटिलिगो एक ऑटोइम्यून त्वचा रोग है, न कि छूत की बीमारी। वर्तमान में फोटोथैरेपी, एक्साइमर लेजर और अन्य उन्नत उपचारों से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। मरीजों को शुरुआती स्टेज में ही उपचार शुरू करना चाहिए।

- डॉ. शरद मेहता, चर्म रोग विशेषज्ञ, एमबी अस्पताल

Published on:
25 Jun 2026 06:20 pm