Holi Festival Marwadi Holi in MP on Sheetla Saptami 2024: होली की सैकड़ों साल पुरानी परम्पराएं आज भी खूबसूरती के ऐसे रंग बिखेरे हुए हैं...सामाजिक ताने-बाने के बीच परम्परागत 'धणी-लुगाई होली' को देखने ग्वालियर की महारानी भी पहुंची थीं यहां, आप भी जानें Holi Festival के ये Interesting Facts
Holi festival Marwadi Holi in MP on Sheetla Saptami 2024: शहर में होली के सातवें दिन यानी शीतला सप्तमी पर अनूठी परंपरा का निर्वाह किया जाता है। इस दिन पति-पत्नी खुली सडक़ पर रंगों से एक-दूसरे को सराबोर करते हैं। सबके सामने पत्नी घूंघट में खड़ी रहती हैं। पति उसे पहचानकर रंग लगाने बड़े कढ़ाव के पास लेकर आता है और रंग से भरी बाल्टी भरकर पत्नी पर उड़ेलता है। यदि ऐसा नहीं हुआ और किसी दूसरी महिला को रंग लगा दिया, तो वह पुरुष हंसी का पात्र बनता है।
श्री क्षत्रिय मारवाड़ी माली समाज के वरिष्ठों ने बताया उज्जैन ही एक मात्र ऐसा शहर है, जहां शीतला सप्तमी पर पति-पत्नी की होली का आयोजन किया जाता है। 200 वर्ष पुरानी इस परंपरागत होली पर्व को देखने के लिए ग्वालियर रियासत की महारानी भी आ चुकी हैं। समाज के नवदंपति जिनकी शादी इस वर्ष हुई है, वह पहली बार होली खेलते हैं। इस दौरान पति पत्नी के नाम की आवाज लगाई जाती है, जिस पर पति अपनी पत्नी को भीड़ में हाथ पकडक़र रंग भरे कड़ाव के समीप लाता है, जहां दोनों एक-दूसरे पर रंग डालते हैं।
श्री क्षत्रिय मारवाड़ी माली समाज के युवा होली दहन के बाद से सप्तमी तक डांडिया खेलते हैं। इसके अलावा समाजजनों के यहां होने वाली संतानों की डूंड का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें समाजजन घर-घर जाकर डूंड करते हुए खाजा, पापड़ की प्रसादी का वितरण करते हैं। वहीं सप्तमी पर मंदिर में सामूहिक डूंड का आयोजन भी किया जाता है।
माली समाज होली के सातवें दिन यानी शीतला सप्तमी पर अनोखी होली खेलता है। इसमें पति को घूंघट में खड़ी पत्नी को पहचान कर रंग लगाता है। शहर के उर्दूपुरा में क्षेत्र में पति-पत्नी (धणी-लुगाई) की अनूठी होली का आयोजन होता है। इसके लिए बड़े कड़ाव रंग भरकर रखे जाते हैं। क्षत्रिय मारवाड़ी माली समाज की महिला परंपरागत वेशभूषा में घूंघट निकाले खड़ी रहती है। पति को पहचान के लिए सांकेतिक सूचना देती है। इस आधार पर पति द्वारा पत्नी पर रंग उड़ेला जाता है। रंग उड़ेलने के क्रम में गलत महिला पर रंग डालने की स्थिति में पति को हंसी का पात्र बनना पड़ता है।