
ललित सक्सेना@उज्जैन. 'खुदा गवाह' है कि पूरी 'सरकार' एकजुट होकर भी 'डॉन' को 'गिरफ्तार' नहीं कर पाई, वह आज भी 'अकेला' ही 'अग्निपथ' पर दौड़ रहा है। लेकिन फिल्मी नामों के सिलसिले में उन्होंने खुद को गिरफ्तार करवा दिया।
बॉलीवुड के महानायक सुपर स्टार अमिताभ बच्चन का (11 अक्टूबर) जन्म दिन है। पूरा देश उन्हें बधाई संदेश दे रहा है। कई लोग उनके बंगले के बाहर घंटों उनकी झलक देखने को खड़े रहते हैं। उज्जैन से भी उनका लगाव रहा है। हालांकि व्यस्तता के चलते वे यहां कम ही आए, लेकिन शहरवासी और महाकाल के पुजारी कहीं न कहीं उनसे लगातार जुड़े रहे। शहरवासी उन्हें किस तरह प्यार करते हैं, 'पत्रिका' द्वारा उनकी भावनाएं प्रकाशित की जा रही हैं। (अमिताभ के जन्म दिन पर विशेष प्रस्तुति शैलेष नाटानी उज्जैन)
अमिताभ की फिल्में, फिल्मों में अमिताभ
मुंबई पुलिस के दो काबिल इंस्पेक्टर 'राम-बलराम' मि. नटवरलाल को आज तक पकड़कर 'अंधे कानून' की 'जंजीर' में नहीं जकड़ पाए हैं। बात 1969 की है, जब वह अपने 'सात हिंदुस्तानी' 'देशप्रेमी' मित्र 'अमर-अकबर-एंथोनी' 'कालिया' व 'आनंद' के साथ 'बरसात की एक रात' में इलाहाबाद से मुंबई निकला था। उस घनघोर रात में 'रेशमा और शेरा' नामक डाकुओं ने काफिले पर हमला कर दिया। 'तूफान' भरी रात में वह 'अकेला' ही 'त्रिशूल' लेकर 'काला पत्थर' की 'दीवार' लांघकर उनसे भिड़ गया। उस दौरान उस पर जो जुल्म हुए, उससे उसकी जिंदगी में 'कोहराम' मच गया और इस भयानक सफर तक वो आ गया।
ऐसा नहीं कि उसकी जिंदगी हमेशा ऐसी ही रही। यह सोचकर वह फ्लैश बेक में भावुक होकर खो जाता है। जब उसके पड़ोसी 'मेजर साहब' ने उसकी जिंदगी बदल कर रख दी थी। युवा अवस्था में अपने 'शराबी' मित्र 'बंटी और बबली' के साथ 'तीन पत्ती' खेला करता था। 'हेराफेरी' करके 'सत्ते पे सत्ता' जैसे पत्ते हासिल कर अपने आपको 'द ग्रेट गेंबलर' समझता था। वह तो भला हो भगवान का कि वह 'मुकद्र का सिकंदर' था जो मेजर साहब के संपर्क में आ गया। उन्होंने उसे दो टुक शब्दों में चेताया कि कब तक 'दो और दो पांच' करते रहोगे और अगर 'खुद्दार' हो तो अपना 'जमीर' जगाओ और 'खून पसीना' बहाकर लोगों की 'कसौटी' पर खरे उतरो।
'गंगा की सौगंध' दिलाई
मेजर साहब रिटायरमेंट के बाद थिएटर किया करते थे। उन्होंने ही उसे अभिनय के क्षेत्र से जोड़ा और 'गंगा की सौगंध' दिलाई कि 'हम' अब एक साथ 'बेनाम' जिंदगी जीएंगे। मेजर साहब के साथ उसने 'भूतनाथ' और 'अजूबा' जैसे कई नाटकों में काम किया। उन दोनों की जोड़ी रंगमंच की दुनिया में 'बड़े मियां-छोटे मियां' के नाम से प्रसिद्ध हो गई। मेजर साहब ने उसे 'इंसानियत' का सबक सिखाया और 'खाकी' वर्दी की इज्जत करना भी। वरना वह तो 'लावारिस' बनकर 'कुली' का किरदार निभाता। इसी दौरान मेजर साहब की इकलौती भतीजी 'गुड्डी' से उसकी 'एक नजर' 'मिली'। गुड्डी उन दिनों 'अभिमान' से भरी थी वह उसे 'कालिया' व लम्बू कहकर उसके साथ अभिनय करने से इंकार कर देती थी। लेकिन वह भी 'परवरिश' में पला-बढ़ा था। सब कुछ सहन करने के बाद एक दिन उसने मेजर साहब को अपने 'प्यार की कहानी' बता दी और उसने बताया कि वह 'चुपके-चुपके' गुड्डी की 'मोहब्बतें' में 'गिरफ्तार' हो चुका है। यह 'सिलसिला' 'बॉम्बे टू गोवा' के सफर से ही चल रहा है और इसमें 'कभी खुशी-कभी गम' भी आए हैं। मेजर साहब ने उसे 'आखिरी रास्ता' बताकर उसे कहा कि 'सूर्यवंशम' की तरह चमको। उसके बाद गुड्डी से तुम्हारा विवाह हो जाएगा। 'वक्त की पुकार' भी यही थी। धीरे-धीरे उसने गुड्डी का दिल जीता और उसे अपना 'नसीब' बनाकर उसके साथ अपना खूबसूरत 'बागवान' सजाया और 'रोटी-कपड़ा-मकान' की जुगाड़ में लग गया। उस दौरान उसके घर में एक खूबसूरत बिटिया 'पिकू' हुई। जिंदगी अपनी रफ्तार से चलने लगी। पिकू कई बार शरारत करके उसे फीकी चाय बनाकर पिलाती, लेकिन वह कभी भी 'चीनी कम' होने की शिकायत नहीं करता और अपने 'पा' होने का सच्चा फर्ज निभाता, क्योंकि उसे आगे जाकर 'बाबुल' भी बनना था।
जिंदगी में तूफान आया
उसकी जिंदगी में तूफान तब आया जब बाल सखा 'इंद्रजीत' जो राजनीति में था, के कहने पर बरसों पुराना 'याराना' 'दोस्ताना' का लिहाज करके इस क्षेत्र में प्रवेश कर गया। बस यहीं से उसके दुश्मनों ने उसके 'विरुद्ध' रोजाना 'गहरी चाल' चलना शुरू कर दी और उसे 'मि. नटवरलाल' साबित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह 'नमक हलाल' था 'नमक हराम' नहीं। उसके दिल में 'इंकलाब' के 'शोले' भड़कने लगे। अपनी भीतरी 'शक्ति' अर्जित करके 'मृत्युदाता' बनकर अपने दुश्मनों को 'ब्लेक' के बजाए उजाले में परिवर्तित कर दिया। मानो वह 'गंगा-जमना-सरस्वती' जैसी पवित्र नदियों में स्नान करके अपनी सही 'मंजिल' पर आ चुका है। उसने 'हिंदुस्तान की कसम' खाई कि वह कभी भी इस क्षेत्र में दोबारा प्रवेश नहीं करेगा और अपनी जिंदगी को 'शमिताभ' और 'मर्द' जैसे जीएगा। चूंकि वह 'नास्तिक' नहीं आस्तिक था, इसलिए वह ईश्वर को इस शानदार जिंदगी के लिए धन्यवाद देता है। उसी के दम पर उसने फिल्म इंडस्ट्री में बरसों तक एकछत्र साम्राज्य किया और बड़ी श्रद्धा से कहता है कि 'गॉड तुस्सी ग्रेट हो'।
अमिताभ को चोट लगने पर महाकाल में हुए थे महामृत्युंजय जाप
कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान जब अमिताभ बच्चन को पेट में गहरी चोट आई थी, तब महाकाल मंदिर में उनके लिए पुजारी-पुरोहितों द्वारा महामृत्युंजय के जाप करवाए गए थे। सुपर स्टार अमिताभ बच्चन का शायद ही ऐसा कोई जन्म दिन रहा हो, जब उन्हें महाकाल का आशीर्वाद न मिला हो। वे भले ही उज्जैन कम आए हों, लेकिन महाकाल से उनका हमेशा से जुड़ाव रहा है। मंदिर के पुजारी पं. रमण त्रिवेदी ने बताया कि हर साल उनके जन्म दिन पर मुंबई जाकर उन्हें महाकाल की फोटो, प्रसाद देता रहा हूं। अब चूंकि उम्रदराज और बीमारी अवस्था के कारण चार-पांच सालों से यह सिलसिला शिथिल हुआ है, लेकिन उन्हें बधाई संदेश और आशीर्वाद देना नहीं भूलता हूं। पं. त्रिवेदी ने पुरानी बातों को ताजा करते हुए कहा कि फिल्म मुकद्दर का सिकंदर के मुहूर्त पर मैंने ही पूजन करवाया था। जब वे राजनीति में चले गए थे, तब प्रचार के सिलसिले में इलाहाबाद बुलाया था, जहां उनके मामा जगदीश राजन के निवास पर हमें ठहराया था। छोटे मियां..बड़े मियां के सेट पर उनकी बहू ऐश्वर्या बच्चन से भी मुलाकात का संयोग बना था।
महानायक के जन्मदिन पर संगीतमय शाम
डॉ. भीमराव अम्बेडकर साहित्यिक सांस्कृतिक शैक्षणिक एवं सामाजिक समिति, उज्जैन सुर साधना म्यूजिकल ग्रुप द्वारा सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के 75वें जन्मदिन केक काटकर जन्मदिन मनाया जाएगा। साथ ही इसी अवसर पर संगीतमय शाम 75 साल बेमिसाल का आयोजन 11 अक्टूबर को शाम 7 बजे कालिदास संकुल हाल में किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक तराना अनिल फिरोजिया रहेंगे। सुर साधना ग्रुप के निदेशक भगवान सिंह अंधेरिया आनंद के निर्देशन में गायकों की प्रस्तुति होगी, जिसमें इं. बृजेश सिंह गौर, योगेन्द्र राज अंधेरिया, लक्ष्मी जिनवाल, डॉ.ओम बैरागी, मनोज नागर, एनएस तोमर, अरुण पांचाल, सुशील गंगवाल, लीना श्रीवास, अश्लेषा राय, मास्टर मन्नु, राजेश राय, सुनिता राठौर, साक्षी द्विवेदी, योगेश वाडिया, कावेरी राय, चंचल चौधरी एवं सूरज नागर उज्जैनी कवि एवं गीतकार का सम्मान किया जाएगा। यह जानकारी संस्था के मीडिया प्रभारी पवन सिंह ने दी।