एमपी के मुख्यमंत्री उज्जैन के बेटे डॉ. मोहन यादव शनिवार को शहर आ रहे हैं। उनके नए राजनीतिक सफर से शहरवासियों की खुशी यहां की सड़कें बयां कर रही हैं। पूरा शहर दोनों बाहें फैलाए स्वागत कर रहा है। पहली बार ऐसी स्थिति बनी है कि न स्वागत मंच लगाने की सामग्री बची है और न ही जगह।
एमपी के मुख्यमंत्री उज्जैन के बेटे डॉ. मोहन यादव शनिवार को शहर आ रहे हैं। उनके नए राजनीतिक सफर से शहरवासियों की खुशी यहां की सड़कें बयां कर रही हैं। पूरा शहर दोनों बाहें फैलाए स्वागत कर रहा है। पहली बार ऐसी स्थिति बनी है कि न स्वागत मंच लगाने की सामग्री बची है और न ही जगह।
शहर में पिछले चार दिन से मशीनें भी होर्डिंग्स-फ्लेक्स प्रिंट करते-करते हांफ चुकी हैं। जिला सत्कार अधिकारी के अनुसार मुख्यमंत्री शनिवार-रविवार को शहर में रहेंगे।
तय कार्यक्रम अनुसार शनिवार को सीएम दोपहर भोपाल से उड़ान भरकर करीब 2.45 बजे उज्जैन पुलिस लाइन हेलीपेड पहुंचेंगे। इसके बाद दशहरा मैदान से रोड शो शुरू होगा। रात 8 बजे उनका रोड शो गोपाल मंदिर क्षेत्र में समाप्त होगा।
सीएम की पत्नी बोलीं- अभी तो पता नहीं कि वे घर आ सकेंगे या नहीं
सीएम का यहां दो दिन का कार्यक्रम है पर घर में रुकने पर संशय है। सीएम डॉ. मोहन यादव के स्वागत में जहां पूरा शहर दुल्हन सा सजा है, वहीं उनकी धर्मपत्नी सीमा यादव का कहना है, हमारे घर भी सजावट हो गई है। उनके स्वागत में हर पल इंतजार में बीतेगा, लेकिन मुझे यह भी पता नहीं कि वे घर तक आ पाएंगे या नहीं। वहीं उनकी बेटी डॉ. आकांक्षा यादव का कहना है यदि पापा घर आते हैं, तो मैं उनको मंगल तिलक लगाकर आरती उतारुंगी।
दशहरा मैदान पर पार्किंग
शनिवार को मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए जिलेभर से भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ी है। बाहर से आने वाले लोगों के लिए ट्रैफिक पुलिस ने वाहनों की पार्किंग के लिए पीजीबीटी कॉलेज की व्यवस्था की है। यहां वाहन पार्क किए जा सकेंगे।
आज महाकाल की नगरी में रुकेंगे सीएम- उज्जैन में महाकाल से बड़ा कोई नहीं, इसलिए कोई राजा के रूप में उज्जैन में रात्रि नहीं रुकता...। सीएम बनने के बाद क्या मोहन यादव अपने ही शहर में रात्रि को रुक पाएंगे, इस बात पर शुरु से ही चर्चा चलने लगी थी।
राजा महाकाल की नगरी में आज तक न राष्ट्रपति, न प्रधानमंत्री और न ही मुख्यमंत्री रुके हैं। लेकिन नए मुख्यमंत्री मोहन यादव उज्जैन के ही रहने वाले हैं और उज्जैन से ही विधायक है, इसलिए आज वे यह मिथक तोड़ सकते हैं।
सीएम मोहन यादव महाकाल के भक्त हैं। मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद मोहन यादव ने इसे महाकाल बाबा की कृपा बताई थी।
ऐसा भी कहा जाता है कि जो नेता यहां रुके, उनकी कुर्सी छिन गई।
इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई और कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का उदाहरण भी दिया जाता है।