मैकेनिकल की माया छोड़, दुनिया बनाने वाले इंजीनियर से मन लगा

आईआईटी कानपुर से इंजीनियर रहे, लाखों का पैकेज छोड़ बने साधु,12 साल पहले ली थी दीक्षा 

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Mar 04, 2016
उज्जैन. सिंहस्थ का दर्शन ही अजब-गजब है। यहां साधु-संत दूर से भले ही साधारण लगे, लेकिन जब इन्हें नजदीक से जानने का मौका मिलता है तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। कोई सिद्ध साधु है, तो कोई बरसो से हठयोगी बन कठिन तपस्या कर रहे हैं। कोई प्रभु की भक्ति के लिए सांसारिक मोहमाया से विरक्त होकर लाखों के पैकेज की नौकरी छोड़ साधु बन गया। इनमें कई साधु तो उच्च शिक्षित हैं जो इस बार के सिंहस्थ में अपने अनुभव साझा कर लोगों को जीना सिखाएंगे। इस बार शहर में ऐसे ही एक बाबा आए हैं जो कानपुर आईआईटी से मैकेनिकल इंजीनियर रहे हैं और लाखों की मोहमाया छोड़ दुनिया बनाने वाले इंजीनियर की शरण आ गए। ये हैं श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़े से जुड़े स्वामी पवन भारती।

पत्रिका की विशेष बातचीत में गुरुवार को स्वामी पवन भारती ने बताया उन्होंने 1984 में आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री प्राप्त की और लाखों के पैकेज में एक निजी कंपनी में नौकरी की। इस दौरान माता पिता का निधन हो गया। तब मन उदास रहने लगा। एक दिन सबकुछ छोड़ संन्यासी जीवन अपनाने का फैसला कर लिया। स्वामी ने बताया जीवन में एक समय ऐसा भी आता है, जब हमें जीवन का मोह नहीं रह जाताछह साल नौकरी की। इसे छोड़कर 2004 में काशी पहुंचे। यहां आवाहन अखाड़े के ब्रह्मलीन श्रीमहंत शंकरानंद भारती महाराज की सेवा कर दीक्षा ली। गुरु के दीक्षा देने के बाद 2009 में गुरु ब्रह्मलीन हो गए। इसके बाद यहीं काशी में रहकर ही अन्य गुरुजनों की सेवा की। स्वामी ने बताया कि पढ़ाई मनुष्य के लिए पांचवां वेद है। गुरु की सेवा करेंगे तब ही मेवा मिलेगा। स्वामी ने बताया कि स्वामी विवेकानंद कहते थे कि जिसमें प्राण हैं, वही ईश्वर है। ईश्वर हमारे अंदर हैं। इन्हें पूजने के लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं। इसी नीति पर विश्वास करते रहो तो हर मार्ग में सफलता मिलती रहेगी और भगवान की भक्ति करते रहो।

108 फीट के शिवलिंग स्थापित करने का है सपना
आध्यात्मिक और संन्यासी जीवन में आने के बाद स्वामी का एक सपना है कि वे भारत में दुनिया का सबसे बढ़ा 108 फीट का शिवलिंग स्थापित करें। पर्यटकों के लिए एक पर्यटन हब भी बनाए। यहां धर्म-संस्कृति से जुड़ी हर जानकारी देंगे। युवाओं को देंगे संदेश- वर्तमान में युवाओं में इच्छा शक्ति और दृड़ संकल्प की कमी है। इसी कारण वे परीक्षा में फेल होने के डर से आत्महत्या कर रहे हैं। साथ ही इनमें जिन्हें उच्च शिक्षा के बाद अच्छी नौकरी नहीं मिलती वे भी गलत कदम उठा लेते हैं। जीवन अनमोल है। जीना हमारे नजरिए पर निर्भर करता है। स्वामी इसी संदेश को इस बार के सिंहस्थ में युवाओं को अलग-अलग सत्र आयोजित कर देंगे।
Published on:
04 Mar 2016 07:24 pm
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