
kailash vijayvargiya : उज्जैन में 17 अगस्त को लाखों लोग उमड़े। नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के संयोग पर श्रद्धालुओं का यह सैलाब आया था। महाकाल के साथ ही भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए देशभर से भक्तों भीड़ यहां आई। शहर में भीड़ के कारण पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। ऐसे जनसैलाब को भी दरकिनार कर प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय नागचंद्रेश्वर मंदिर पहुंच गए थे। उन्होंने गर्भगृह में पूरी तसल्ली से पूजा अर्चना की जबकि बाहर लाखों भक्त धक्के खाते रहे। एक दर्जन से ज्यादा लोग तो धक्कामुक्की में घायल हो गए थे। वीआईपी दर्शन की इस व्यवस्था का अब जमकर विरोध किया जा रहा है। बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भी मंदिरों में वीआईपी दर्शन बंद करने की बात कही है।
सावन सोमवार और नाग पंचमी एक साथ होने के कारण उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर के सामने बैरिकेडिंग क्षेत्र में अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। धक्का-मुक्की, गर्मी और भारी भीड़ के कारण कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई। इन भक्तों को उज्जैन जिला अस्पताल पहुंचाया गया जहां सभी का उपचार किया गया।
उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी पर ही खुलते हैं। इस बार श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या करीब 8.66 लाख थी। वहीं, श्री महाकालेश्वर मंदिर में 4 लाख 80 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। बाबा महाकाल की सवारी में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर दर्शन किए।
एक ही दिन में 12 लाख से ज्यादा लोगों के आ पहुंचने से प्रशासन के लिए भीड़ को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बन गई थी। बाबा महाकाल और नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए करीब 5 किमी लंबी लाइन लगी थी। मंदिर से करीब दो किलोमीटर हरसिद्धि मंदिर के पास धक्का-मुक्की के कारण हादसा हुआ।
लाखों श्रद्धालुओं की इस भीड़ के बीच भी कुछ वीआईपी नागचंद्रेश्चर मंदिर के गर्भगृह में गए और इत्मिनान से पूजा-अर्चना भी की। जहां आम श्रद्धालु कई घंटों से लाइन में लगे थे वहीं प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, आसानी से मंदिर के गर्भगृह में पहुंच गए। उन्होंने जलाभिषेक किया। बीजेपी के कई अन्य नेता, विधायक, सांसद के परिजनों ने भी वीआईपी दर्शन किए। इसे लेकर श्रद्धालुओं ने बाद में नाराजगी भी जताई।
अप्रत्याशित भीड़ के कारण व्यवस्थाएं कम पड़ गईं। भीड़ के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को वापस लौटना पड़ा। कई भक्त जूते- चप्पल निर्धारित स्टैंड तक पहुंचने के बजाय रास्तों में ही छोड़कर आगे बढ़ गए। कर्कराज मंदिर की पार्किंग में जूते-चप्पलों का ढेर इतना बढ़ गया कि उसे हटाने के लिए नगर निगम को जेसीबी की मदद लेनी पड़ी। कई श्रद्धालु जूते-चप्पल रास्तों में ही छोड़कर दर्शन के लिए चले गए और भीड़ के कारण वापस नहीं पहुंच सके। कर्कराज मंदिर पार्किंग स्थित जूता स्टैंड पर जूते-चप्पलों का ढेर पहाड़ जैसा नजर आने लगा।