राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ पुस्तक का लोकार्पण समकालीन लघुकथा पर चर्चा के बीच साहित्यकारों ने रखे विचार साहित्यिक आयोजन में हुआ विमोचन
उज्जैन। नगर के वरिष्ठ लघुकथाकार संतोष सुपेकर के नवीन लघुकथा संग्रह ‘अविश्वास चक्र’ का विमोचन सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित समकालीन लघुकथा की राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान किया गया। यह सुपेकर का नौवां लघुकथा संग्रह है, जिसे साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकारों और विद्वानों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए ‘सरल काव्यांजलि’ के मानसिंह शरद ने बताया कि समारोह में करनाल के ख्यात लघुकथा मर्मज्ञ डॉ. अशोक भाटिया, राजस्थान के साहित्यकार माधव नागदा, इंदौर के सूर्यकांत नागर, डॉ. पुरुषोत्तम दुबे, डॉ. शिव चौरसिया और श्रीराम दवे विशेष रूप से उपस्थित थे। सभी अतिथियों ने लघुकथा विधा के महत्व और उसके बदलते स्वरूप पर अपने विचार साझा किए। साहित्यकारों ने कहा कि वर्तमान समय में लघुकथा समाज के यथार्थ को संक्षिप्त लेकिन प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने की सशक्त विधा बन चुकी है।
इस अवसर पर पुस्तक पर चर्चा करते हुए विश्वविद्यालय के कुलानुशासक एवं प्रसिद्ध समालोचक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि संतोष सुपेकर की लघुकथाएँ केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि जीवन के कठोर और तीखे अनुभवों से पाठकों को रूबरू कराती हैं। उन्होंने बताया कि ‘अविश्वास चक्र’ संग्रह में लेखक ने उन घटनाओं और प्रसंगों को संवेदनशीलता से उकेरा है, जिन्हें आमतौर पर समाज अनदेखा कर देता है।
प्रो. शर्मा ने आगे कहा कि इस संग्रह की लघुकथाओं में विषयवस्तु के साथ-साथ शिल्प और भाषा के स्तर पर भी सार्थक प्रयोग दिखाई देते हैं। ये प्रयोग लघुकथा विधा को नए आयाम देने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में मुकेश जोशी, वसुधा गाडगिल, शशांक दुबे और डॉ. हरीश कुमार सिंह सहित कई साहित्यप्रेमी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अवसर को साहित्यिक संवाद और विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बताया।