उज्जैन

MP Election 2018 : दोनों प्रमुख दलों के लिए जिले में पैचीदा हुआ टिकट समीकरण

भाजपा के लिए दो, तो कांग्रेस के लिए तीन सीटों पर उलझन बढ़ी, नहीं तय कर पा रहे नाम

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Nov 07, 2018
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उज्जैन. नामांकन की आखिरी तारीख के दो दिन पहले तक भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुुख राजनीतिक दल जिले की सभी सातों विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कर पाए हैं। जिन विधानसभाओं में प्रत्याशी तय होना शेष हैं, वे एेसी सीट हैं जहां पार्टियां समिकरण नहीं बिठा पा रही हैं। कहीं जातिगत समीकरण आड़े आ रहे हैं तो कहीं वरिष्ठ नेताओं की राय टकरा रही है। इस कशमकश के बीच इन सीटों के दावेदार अपना पलड़ा भारी करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।

अधिकृत घोषणा में हो रही देर
जिले में भाजपा अब तक महिदपुर व घट्टिया में प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है वहीं कांग्रेस उज्जैन उत्तर, दक्षिण और महिदपुर पर अपने प्रत्याशी नहीं उतार सकी है। प्रत्याशियों के नामों की अधिकृत घोषणा में हो रही देरी के पीछे प्रमुख कारण उक्त सीटों पर खींचतान का बढऩा तो है ही, विरोध के स्वर तेज होने का डर भी है। सूत्रों के अनुसार भाजपा टिकट वितरण के बाद से उठ रहे विरोधों को शांत करने में व्यस्त हैं वहीं कांग्रेस वरिष्ठ नेताओं की आपसी टकराहट को दूर करने में जुटी हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार दोनों ही पार्टियां विवादित सीटों पर नाम तय करने के बाद बनने वाली स्थितियों का आंकलन करने के साथ ही डेमेज कंट्रोल के तरीकों पर मंथन कर रही हैं।

जिताऊ चेहरे के साथ समीकरण बैठाने का प्रयास
कांग्रेस ने अभी सात में से चार सीट, बडऩगर, नागदा, घट्टिया व तराना पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। सामाजिक समीकरण के आधार पर देखें तो इनमें से दो सीट आरक्षित हैं वहीं दो पर ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया है। मसलन अभी सवर्ण व अल्प संख्यक का प्रतिनिधत्व नहीं हो पाया है। इसी तरह राजनीतिक नजरिए के आधार पर दिग्विजयसिंह के दो समर्थक और कमलनाथ व ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक-एक समर्थक को मौका मिला है।

बड़ी चुनौती प्रत्याशी चयन की
शेष तीन सीटों पर जातिगत समीकरण बैठाने और वरिष्ठ नेताओं एक राय बनाने के साथ ही बड़ी चुनौती जिताऊ प्रत्याशी के चयन की है। सूत्रों के अनुसार पार्टी सर्वे में कुछ उम्मीदवार जिनका फीडबैक अच्छा मिला है, वे सामाजिक या राजनीतिक समिकरण में उलझ रहे हैं वहीं कुछ इन समिकरणों की परीक्षा में पास हो रहे हैं तो सर्वे में उनका रिजल्ट कमजोर है। इधर पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू के भाजपा में शामिल होने से भी पार्टी के समिकरण गड़बड़ाने की बात कही जा रही है।

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Updated on:
06 Nov 2018 10:19 pm
Published on:
07 Nov 2018 07:35 am
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