उज्जैन

बाबा महाकाल के सामने पहुंचते ही आंखें भर आती हैं

Ujjain News: महाकाल के दरबार आने वाले उम्रदराज लोगों को दर्शन के लिए लंबी कतार में इतना चलना पड़ रहा है, कि वे चलते-चलते जब तक बाबा के सामने पहुंचते हैं, तो उनकी आंखें भर आती हैं।

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Dec 17, 2019
Ujjain News: महाकाल के दरबार आने वाले उम्रदराज लोगों को दर्शन के लिए लंबी कतार में इतना चलना पड़ रहा है, कि वे चलते-चलते जब तक बाबा के सामने पहुंचते हैं, तो उनकी आंखें भर आती हैं।

उज्जैन. राजाधिराज भगवान महाकाल के दरबार आने वाले उम्रदराज लोगों को दर्शन के लिए लंबी कतार में इतना अधिक चलना पड़ रहा है, कि वे चलते-चलते जब तक बाबा के सामने पहुंचते हैं, तो उनकी आंखें थकान और यहां की अव्यवस्था के कारण भर आती हैं। कई लोगों को तो मंदिर आने के बाद तक भी यह पता नहीं चल पाता है कि आखिर सीनियर सिटीजन के लिए कहां से प्रवेश मिलेगा। बाहर से आने वाले इधर-उधर पूछते हैं और जो जैसा बता देता है, वे उस तरफ चल देते हैं।

प्रतिदिन सैकड़ों वरिष्ठ परिजन के साथ दर्शन करने पहुंचते हैं

महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों वरिष्ठ नागरिक अपने परिजन के साथ बाबा के दर्शन करने मंदिर पहुंचते हैं। इनमें कुछ स्थानीय तो कुछ बाहरी श्रद्धालु होते हैं। स्थानीय को तो पता है कि उन्हें किधर से निकलना है, इसके बावजूद वे गार्ड और पुलिस की बदसलूखी का शिकार होते हैं। रहा सवाल बाहर से आने वाले बुजुर्ग दर्शनार्थियों का, तो वे मंदिर के बाहर तो चलते ही हैं, मंदिर के अंदर भी करीब डेढ़ से दो किलोमीटर का रास्ता तय करके बाबा के समक्ष पहुंचते हैं। यहां भी उन्हें पलभर ठहरने नहीं दिया जाता और बाहर निकाल दिया जाता है। बता दें कि पत्रिका ने इस मामले को लेकर (वरिष्ठों को मिले सम्मान अभियान) शुरू किया है, जिससे यहां पहुंचने पर कोई श्रद्धालु किसी भी प्रकार से अपमानित न हो।

रुक-रुककर चलाया जाता है
मंदिर आने के बाद आम दर्शनार्थियों को कतारबद्ध चलना होता है। सबसे पहले वे झिगजेग में चलते हैं, इसके बाद उन्हें फेसेलिटी सेंटर के बैरिकेड्स में रुक-रुककर चलाते हैं। यहां तैनात गार्ड और पुलिस बीच-बीच में सभी की लाइनें रोकते हैं और संदेश आने पर छोड़ते हैं। इतनी देर तक खड़े रहने वाले बुजुर्ग परेशान हो जाते हैं।

कहीं रैम्प, तो कहीं सीढिय़ां
आम दर्शनार्थियों की कतार में कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं। कहीं रैम्प बना है, तो कहीं सीढिय़ां। ऐसे में लडख़ड़ाते बुजुर्ग हाथों में फूलों की डलिया लिए खुद को संभालते हुए जैसे-तैसे इन रास्तों से होकर बाबा के सामने पहुंचते हैं। मंदिर के बाहर से लेकर गर्भगृह के सामने पहुंचने में इन्हें करीब डेढ़ घंटे से अधिक का वक्त लग जाता है।

रजिस्टर में ढेरों शिकायतें, हल करने की फुर्सत नहीं..
प्रोटोकॉल ऑफिस में रखे कम्प्लेंट रजिस्टर में ढेरों शिकायतें श्रद्धालुओं ने अपने हाथ से लिखी हैं। 2018 से लेकर अभी तक इस रजिस्टर में अनेक शिकायतें सिर्फ सीनियर सिटीजन की समस्याओं की है। दिल्ली के वीरेंद्र कुमार बंसल, इंदौर के विनोद कुमार शर्मा और रतलाम के सुनील माथुर ने अपने घर के पते के साथ खुद के मोबाइल नंबर तक लिखे हैं, ताकि इन शिकायतों पर यदि किसी को कभी कुछ बदलाव करना हो, तो वे उनसे बात भी कर लें, लेकिन मंदिर प्रबंध समिति के जिम्मेदारों को इतनी फुर्सत कहां।

Published on:
17 Dec 2019 11:42 am
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