समर्थन मूल्य पर खरीदा गया करीब ३० हजार मिट्रिक टन गेहूं खुले में पड़े हुआ है। जिस वजह से मौसमी प्रकोप के चलते इसके खराब होने की संभावना बनी है।
उज्जैन। समर्थन मूल्य पर खरीदा गया करीब ३० हजार मिट्रिक टन गेहूं खुले में पड़े हुआ है। जिस वजह से मौसमी प्रकोप के चलते इसके खराब होने की संभावना बनी है। परिवहन ठेकेदार की लापरवाही के चलते एसडीएम ने कलेक्टर को पत्र लिखकर कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा है।
जिले में अब तक कुल २.४० लाख मिट्रिक टन गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई है। लेकिन अब तक केवल २.१० लाख मिट्रिक टन गेहूं ही गोदामों तक पहुंच पाया है। ३० हजार मिट्रिक टन गेहूं अब भी खुले में पड़ा हुआ है। जिससे इसके खराब होने की संभावना बनी हुई है। सबसे खराब हालत महिदपुर ब्लॉक की है। यहां करीब १२ हजार मिट्रिक टन गेहूं खुले में पड़ा हुआ है। इसके अलावा नागदा, खाचरौद, बडऩगर, घट्टिया ब्लॉक के तहत समर्थन मूल्य पर खरीदी केंद्रो पर १८ हजार मिट्रिक टन गेहंू खुले में पड़ा हुआ है। महिदपुर एसडीएम आरके राय ने कलेक्टर का पत्र लिखकर परिवहन ठेकेदार रश्मि अग्रवाल निवासी इंद्रा नगर और पेटी कांट्रेक्टर मालवा रोड लाईंस पर कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा है।
सूचना के बावजूद नहीं लगा रहे ट्रक
एसडीएम ने बताया कि ठेकेदार को कई बार सूचना पहुंचाने और फोन करने के बावजूद वह ट्रक नहीं भेज रहा है। जिस वजह से गेहूं खुले में ही पड़ा हुआ है। जिस वजह से बारिश आदि के कारण गेहूं खराब होने की दशा में कानून व्यवस्था बिगडऩे की संभावना बनी हुई है। इसलिए संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
रैक की की गई है व्यवस्था
जिला खाद्य अधिकारी एसएन माहेश्वरी ने बताया कि महिदपुर में गेहूं परिवहन के लिए रैक की व्यवस्था की गई है। यहां गुरूवार-शुक्रवार तक रैक लगेगी। इसके बाद यहां संग्रहित सारा गेहूं रैक में भरकर गोदामों तक पहुंचा दिया जाएगा।
बीजों को सड़क पर रखकर किसान करेंगे प्रदर्शन
उज्जैन। बीजों को सड़क पर रखकर जिले के किसान विभिन्न मांगों को लेकर गुरूवार को प्रदर्शन करेंगे। मंडी उपाध्यक्ष शेरू पटेल ने बताया कि भावांतर योजना में रूके भुगतान, समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी मेंं आ रही समस्याओं और अन्य मांगो को लेकर गुरूवार सुबह ११ बजे कोठी पैलेस पर प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रतिबीघा १५ क्विंटल तक लहसुन बेच सकेंगे किसान
इधर भावांतर योजना के तहत किसानों द्वारा लहसुन बेचने की सीमा को शासन ने बढ़ाते हुए १५ क्विंटल प्रतिबीघा कर दिया है। पूर्व में ये सीमा १० क्विंटल प्रतिबीघा थी। जिसके बढ़ाते हुए शासन ने ७५ क्विंटल प्रति हेक्टेयर कर दिया है।