पानी अपव्यय के सवालों पर रुकी सड़कों की धुलाई
उज्जैन. पानी अपव्यय के सवाल उठने पर नगर निगम का सड़क धुलाई अभियान एक दिन में ही थम गया। स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले निगम ने शहर की प्रमुख सड़कों की धुलाई कुएं-बावड़ी के अनुपयोगी पानी से करना शुरू कराई थी, लेकिन कुछ बुद्धिजीवियों ने इसे जल अपव्यय बताते हुए आपत्ति उठा दी। आलोचना का शिकार ना होना पड़े इस कारण निगम ने धुलाई कार्य रोक दिया। वार्डों में सफाई कार्य के लिए पीएचई के टैंकर लगाए थे, जिनसे सभी सड़क, डिवाइडर व मुख्य मार्ग चकाचक होना थे। इसी बीच रूपांतरण संस्था के राजीव पाहवा व कुछ लोगों ने इसे जल अपव्यय बताते हुए महापौर-निगमायुक्त से बात की। कहा पानी काम का नहीं है तो इसे पेड़-पौधों में डलवा दें, बहाने से क्या फायदा। एक दिन छोड़कर हो रहे जलप्रदाय के दौर में निगम ने आलोचना से बचने तत्काल सड़कों की धुलाई पर रोक लगा दी। हालांकि जो पानी उपयोग में लिया जा रहा था, उससे उपेक्षित जलस्रोत रिचार्ज हो जाते, लेकिन इस बारीकी पर ध्यान नहीं गया।
चौराहे और मूर्ति की धुलाई
निगम अमला ने सप्ताहभर का प्लान तैयार किया है। हर एक दिन शहर के निर्धारित मार्ग पर पानी की धुलाई से शहर को चमकाया जाता है। इसमें चौराहो की सफाई के साथ मूर्ति तक धोया जाता है। बता दे कि कुछ दिन बाद ही सर्वेक्षण टीम का उज्जैन में दौरा होने वाला है और इसी के कारण सक्रियता ज्यादा बढ़ गई है।
निगम का ध्यान स्वच्छता सर्वेक्षण पर
उज्जैन नगर निगम का पूरा ध्यान स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन करना है। इसके लिए पूरा अ अमला मैदान में है। महापौर व पार्षदों के साथ निगामायुक्त तक जागरूक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे है और लोगों को जागरूक कर रहे है। ऐसे तमाम शानदार कार्यक्रम के बीच पानी की बर्बादी का प्रश्र उठते ही तत्काल कार्रवाई को रोक दिया गया।