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Ujjain news: ‘बाहर की दवा मत लिखना, खरीद नहीं पाऊंगा…’ रुंधे गले से बोले ‘माही’ के पापा, चेहरे पर लगे 55 टांके

Mahi treatment: डॉक्टरों की मेहनत से ही बेटी की जान बची है, लेकिन इलाज के साथ आर्थिक चिंता भी लगातार सता रही है।

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Mahi treatment: डॉक्टरों की मेहनत से बेटी की जान बची (Photo Source - Patrika)

Mahi treatment: डॉक्टरों की मेहनत से बेटी की जान बची (Photo Source - Patrika)

Dog bite case: तीन साल की मासूम माही जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है, लेकिन उसके पिता कालू सिंह हर पल एक और लड़ाई लड़ रहे हैं, बेटी को बचाने और इलाज का खर्च उठाने की। फोन पर बातचीत के दौरान उनकी आवाज कई बार भर आई। उन्होंने बस इतना कहा, मेरी बेटी ठीक हो जाए… पैसे कहां से आएंगे, यह बाद की बात है। डॉक्टर साहब से कह दिया है कि बाहर की दवा मत लिखना, मैं खरीद नहीं पाऊंगा।

एक पिता की यह बेबसी केवल आर्थिक तंगी की कहानी नहीं, बल्कि उस दर्द की तस्वीर है जिसमें अचानक आई एक दुर्घटना पूरे परिवार को असहाय बना देती है। माही के चेहरे पर 55 टांके लगे हैं और उसका इलाज इंदौर के एमवाय अस्पताल में चल रहा है। कालू सिंह घटना को याद करते हुए कांपती आवाज में कहते हैं, जब मैंने बेटी को खून से लथपथ देखा तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। समझ नहीं आया क्या करूं। बस भगवान से यही प्रार्थना करता रहा कि मेरी बच्ची बच जाए। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी दोनों मानसिक रूप से टूट चुके हैं।

डॉक्टरों की मेहनत से ही जान बची

डॉक्टरों की मेहनत से ही बेटी की जान बची है, लेकिन इलाज के साथ आर्थिक चिंता भी लगातार सता रही है। आंसू रोकते हुए उन्होंने व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। बोले, आज मेरी बेटी शिकार बनी है, कल किसी और का बच्चा होगा। इन आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए। आखिर कब तक लोग ऐसे हमलों का शिकार होते रहेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि महिदपुर तहसील के देलवाड़ी गांव में सोमवार को माही घर के बाहर खेल रही थी, तभी एक आवारा श्वान ने उस पर अचानक हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उस आवारा श्वान ने बेहद आक्रामक तरीके से उसके चेहरे को बुरी तरह नोंच डाला था। बच्ची को संभलने का मौका तक नहीं दिया।

डॉक्टरों ने स्टेंटिंग कर बचाई आंख

माही की दाईं आंख की निचली पलक फट गई। भीतरी हिस्से को सहारा देने वाला (मेडियल कैंथस) का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। एमवायएच के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने जटिल सर्जरी से आंख की संरचना सुरक्षित रखी। विभाग की प्रभारी डॉ. प्रीति रावत ने बताया, ऐसी चोट से भविष्य में आंसू निकलने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। एमवाय अस्पताल के नेत्र विभाग में भर्ती बच्ची का विस्तृत परीक्षण किया गया। विशेषज्ञों की टीम ने 15 जून को सामान्य एनेस्थीसिया (जनरल एनेस्थीसिया) के तहत ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान फटी हुई निचली पलक की सर्जरी की। आंसू की नलिका और आसपास की संरचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए स्टेंटिंग की गई।

बच्ची की हालत स्थिर

अस्पताल प्रशासन के अनुसार ऑपरेशन सफल रहा है और बच्ची की स्थिति फिलहाल स्थिर है। उसे निगरानी में रखा गया है तथा संक्रमण से बचाव और घाव के शीघ्र भरने के लिए आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। अगर देरी होती तो कार्निया प्रभावित हो सकता था लेकिन उसे बचा लिया गया है। अब आगे आंख के देखने की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।