
उज्जैन. नौ ग्रहों में मंगल व बुध ने अपनी चाल बदली ली। शनि भी 26 अक्टूबर को वक्री से मार्गी होकर कृपा बरसाएंगे। मंगल 27 अगस्त से सिंह राशि में थे। 13 अक्टूबर को मंगल ने कन्या राशि में प्रवेश किया। कन्या में मंगल 29 नवंबर तक रहेंगे। बुध भी 26 सितंबर से कन्या राशि में थे और 13 अक्टूबर को तुला राशि में आए, ये तुला में 29 अक्टूबर तक रहेंगे। इसी दिन बुध उदय भी हो जाएंगे।
ज्योतिषाचार्यो के अनुसार शनि धनु राशि में रहकर 26 अक्टूबर को मार्गी हो रहे हैं। हालांकि 5 दिसंबर को शनि अस्त हो जाएंगे, जो शनि 7 जनवरी 2018 को उदय होंगे। लेकिन मार्गी रहकर शनि तब तक साढ़े साती व ढय्या वालों को राहत मिलेगी।
यहां दीपावली पर करते हैं पूर्वजों का श्राद्ध
मक्सी. गुर्जर समाज की ओर से विगत कई वर्षों से एक अनूठी परंपरा का निर्वाहन किया जा रहा है। इसके अनुसार दीपावली पर गुर्जर समाजजन जमा होकर पूर्वजों का तर्पण करते हैं। इसी क्रम में गुरुवार को मक्सी से समाजजनों ने नगर के पास स्थित तालाब पर जाकर तर्पण किया।
लोकगीतों से गूंजता घर-आंगन
दीपावली पर जहां सभी लोग माता लक्ष्मी का पूजन करते है वहीं मक्सी के गुर्जर समाजजन पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं, जिसे तर्पण भी कहा जाता है। इसके लिए गुर्जर समाज के लोग अपने घर से पूजन सामग्री लेकर आते हैं। सभी समाज के राव अपने यजमान के साथ एक विशेष प्रकार का लोकगीत गाते हुए नदी या तालाब के पास पहुंचते हैं। समाजजन भी राव के पीछे नदी या तालाब के पास जमा हो जाते हैं। यहां पर सभी लोग मिलकर पूजन पाठ व धूप ध्यान देकर अपने पूर्वजों को निमित्त करते हैं। इसके बाद एक विशेष प्रकार का पौधा जिसे ओजीझाड़ा कहते हैं, लेकर आते है और उसकी बेल बनाते है, जिसे बेलड़ी लगाना भी कहते हैं। फिर सभी लोग पानी में उतरकर एक लाइन में लगते हैं और अपने हाथों में पुड़ी व खीर ले लेते हैं। अंत में सभी लोग झुककर तीन बार पानी में हाथ की खीर पूड़ी को हिलाने के बाद एक साथ छोड़ देते हैं।
मांगते हैं क्षमा
नदी में पूर्वजों के लिए खीर और पूड़ी छोडऩे के बाद सभी लोग हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों से वर्ष भर जाने अनजाने में हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा मांगते हैं। समाज के लोगों का मानना है कि ऐसा करने से पूर्वज उनके अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उन्हें सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
पड़वां पर गाय का पूजन
सामूहिक रूप से पूर्वजों का तर्पण करने के बाद सभी लोग दीपावली के अगले दिन पड़वा को गाय का पूजन करते हैं। इसके बाद गाय को छेड़ा खिलाया जाता है। नगर में वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का सभी पालन करते हैं।