
Narendragiri Ji Maharaj
देहरादून। संतों को महिलाओं द्वारा 'भ्रष्ट' बनाने के आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच शुक्रवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व अखिल भारतीय संत समिति आमने-सामने आ गए। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने ये कहकर लोगों को हैरान कर दिया कि संतों और साधुओं को महिलाओं से अकेले में नहीं मिलना चाहिए तो वहीं अखिल भारतीय संत समिति ने अखाड़ा परिषद को ही सलाह दे डाली कि वे अपने संतों को कंट्रोल में रखें और समस्त नारी जाती का अपमान न करें.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने संतों पर लग रहे यौनाचार के आरोपों को देखते हुए साधू और संतों को महिलाओं से अकेले में न मिलने की सलाह दे डाली। महंत नरेंद्र ने संतों को राय दी कि महिलाओं से परिवार की उपस्थिति में ही मिलें। उन्होंने कहा कि यद्यपि संत समाज नारी का सम्मान करता है, परंतु नारियों को अकेले आश्रम में न रूकने दें।
कई संतों ने भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की सलाह का समर्थन किया। अखाड़ा परिषद के बयानों का असर सबसे पहले हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ श्रीदक्षिण काली मंदिर के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी के यहां देखने को मिला। कैलाशानंद ब्रह्मचारी विश्राम कक्ष के बाहर बाकायदा बोर्ड लगाया गया है कि गुरुजी के विश्राम कक्ष में महिलाओं का प्रवेश निषेध है। उन्होंने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि की सलाह पूरी तरह तार्किक और समय की मांग के अनुरूप है।
अखाड़ा परिषद का यह बयान हरिद्वार और ऋषिकेश के विभिन्न अखाड़ों और संतों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था कि अखिल भारतीय संत समिति ने अखाड़ा परिषद के बयानों पर सवाल उठा दिया। वह भी काफी तीखे शब्दों में। संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगंबर ने कहा कि अखाड़ा परिषद अपने संतों पर लगाम लगाए, न कि नारी जाति को बदनाम करे। परिषद के बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे आश्रम में आने वाली सभी औरतें खतरनाक हों। संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि महामंडलेश्वर तो स्वयं चेलियां बना रहे हैं। यह अंकुश संतों पर लगना चाहिए कि वे सिर्फ पुरूषों को अपना शिष्य बनाएं।
हठयोगी बाबा ने कहा कि कुछ साधु-संतों की कमियों को महिलाओं पर थोपा जा रहा है। ऐसा लगता है कि सारे संत महिलाओं के कारण जेल गए, परंतु जो जेल में हैं, उनके कर्म संतों जैसे बिल्कुल नहीं थे। वास्तव में तो उन्होंने संतों की नाम और मर्यादा सब मिट्टी में मिला दी जिसका दंड समूचे संत समाज को भुगतना पड़ रहा है। इसके उल्टे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ऐसा प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे सारी महिलाएं संतों की स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।
Published on:
6 Oct 2017, 7:06 PM IST
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